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तमिलनाडु में 'रेस्टो-बार' मॉडल पर विचार, TASMAC ला सकता है नई लाइसेंसिंग व्यवस्था

Kavita2
17 July 2026 9:11 AM IST
तमिलनाडु में रेस्टो-बार मॉडल पर विचार, TASMAC ला सकता है नई लाइसेंसिंग व्यवस्था
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चेन्नई: तमिलनाडु में शराब बिक्री का संचालन करने वाली सरकारी संस्था TASMAC (Tamil Nadu State Marketing Corporation) के कामकाज में बड़े बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हाल के दिनों में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि राज्य सरकार पड़ोसी राज्यों की तर्ज पर TASMAC से जुड़े रेस्तरां आधारित 'रेस्टो-बार' मॉडल को लागू करने पर विचार कर रही है। इसके तहत मौजूदा बार व्यवस्था में बदलाव करते हुए नई लाइसेंसिंग प्रणाली शुरू किए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

हालांकि, इस संबंध में अभी तक राज्य सरकार या TASMAC की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और प्रशासनिक हलकों में चल रही चर्चाओं के अनुसार, सरकार शराब परोसने की वर्तमान व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से नए विकल्पों का अध्ययन कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित योजना के तहत TASMAC आउटलेट्स से जुड़े मौजूदा बारों की संख्या में कमी लाई जा सकती है। इसके स्थान पर निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले रेस्तरां को लाइसेंस देकर 'रेस्टो-बार' संचालित करने की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। इस मॉडल में ग्राहकों को भोजन के साथ नियंत्रित वातावरण में शराब परोसने की सुविधा मिलेगी, जैसा कि कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी जैसे पड़ोसी क्षेत्रों में पहले से देखने को मिलता है।

माना जा रहा है कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो बार संचालन के लिए नई लाइसेंसिंग नीति तैयार की जाएगी। इसमें स्वच्छता, सुरक्षा, पार्किंग, अग्निशमन व्यवस्था, बैठने की क्षमता, खाद्य गुणवत्ता और निर्धारित समय सीमा जैसे कई मानकों को शामिल किया जा सकता है। केवल उन्हीं प्रतिष्ठानों को लाइसेंस मिलने की संभावना होगी जो सरकार द्वारा तय किए गए सभी नियमों और शर्तों का पालन करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान में TASMAC आउटलेट्स से जुड़े कई बारों की स्थिति को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर साफ-सफाई, पर्याप्त सुविधाओं और सुरक्षित माहौल की कमी की शिकायतें दर्ज होती रही हैं। ऐसे में रेस्तरां आधारित मॉडल लागू होने से ग्राहकों को अपेक्षाकृत बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।

इसके अलावा सरकार को भी नई लाइसेंसिंग प्रणाली से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना है। लाइसेंस शुल्क, वार्षिक नवीनीकरण और अन्य नियामकीय शुल्कों के माध्यम से राज्य के राजस्व में वृद्धि हो सकती है। साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ने से आतिथ्य उद्योग को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

उद्योग जगत से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पारदर्शी तरीके से लाइसेंस जारी किए जाते हैं तो इससे होटल और रेस्तरां व्यवसाय को नई गति मिल सकती है। पर्यटन क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाले रेस्टो-बार विकसित होने से घरेलू और विदेशी पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

हालांकि, इस संभावित बदलाव को लेकर सामाजिक संगठनों और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंताएं भी सामने आ सकती हैं। उनका मानना है कि शराब की उपलब्धता और परोसने की सुविधाओं में विस्तार से सामाजिक प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। यदि नई नीति लागू की जाती है तो इसके साथ सख्त निगरानी, आयु सत्यापन, जिम्मेदार शराब सेवन को बढ़ावा देने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना आवश्यक होगा।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नई लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू करने से पहले संबंधित नियमों और अधिसूचनाओं में संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है। साथ ही विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे, ताकि नीति लागू होने के बाद किसी प्रकार की प्रशासनिक या कानूनी अस्पष्टता न रहे।

राजनीतिक हलकों में भी इस संभावित कदम को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कुछ लोग इसे राज्य के राजस्व और पर्यटन को बढ़ावा देने वाला निर्णय मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि सरकार को सामाजिक प्रभावों और जनहित के सभी पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श के बाद ही अंतिम फैसला लेना चाहिए।

फिलहाल स्थिति यह है कि रेस्टो-बार मॉडल और नई लाइसेंसिंग व्यवस्था को लेकर केवल विचार-विमर्श और संभावित प्रस्तावों की चर्चा हो रही है। सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक नीति, अधिसूचना या समयसीमा जारी नहीं की गई है। ऐसे में अंतिम निर्णय आने तक इन खबरों को संभावित प्रशासनिक विचार के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

यदि तमिलनाडु सरकार भविष्य में इस दिशा में कदम उठाती है, तो यह राज्य की शराब बिक्री और बार संचालन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है। इससे एक ओर उपभोक्ताओं को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद होगी, वहीं दूसरी ओर सरकार के सामने नियमन, सामाजिक जिम्मेदारी और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की चुनौती भी रहेगी। इसलिए सभी की नजर अब राज्य सरकार के अगले आधिकारिक फैसले पर टिकी हुई है।

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