
मदुरै: FQL और Neomax स्कैम में हज़ारों लोगों के करोड़ों रुपये डूबने की खबरें लगातार आ रही हैं। वहीं, मदुरै के वे निवेशक जिन्होंने 2015 में 'डिस्क एसेट्स' (Disc Assets) स्कैम में 1,200 करोड़ रुपये गंवाए थे, वे अब भी अपने डूबे हुए निवेश के पैसे का इंतज़ार कर रहे हैं।
इस कथित वित्तीय धोखाधड़ी के पीछे 'डिस्क एग्रोटेक लिमिटेड' (Disc Agrotech Limited) नाम की कंपनी थी, जिसने 2006 में मदुरै में अपना कामकाज शुरू किया था। इसकी ग्रुप कंपनियों के कई नाम थे, जिनमें "Disc" शब्द पहले या बाद में जुड़ा होता था।
इस धोखाधड़ी में शामिल अनुमानित रकम 1,200 करोड़ रुपये है।
'डिस्क एलायन ग्रुप ऑफ़ कंपनीज़ इन्वेस्टर्स एंड एजेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन' के सदस्यों ने बताया कि कंपनी ने निवेशकों को ज़्यादा से ज़्यादा रिटर्न का भरोसा दिलाया था। तमिलनाडु और पड़ोसी राज्यों के लगभग 12.5 लाख लोगों ने इसमें निवेश किया था। जब कंपनी रिटर्न दे रही थी, तब लगभग पाँच लाख निवेशकों को कुल 400 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा मिला था। इस सफलता से प्रेरित होकर, बाद के सालों में सात लाख से ज़्यादा और लोगों ने ग्रुप की 34 सिस्टर कंपनियों में निवेश किया।
एक और निवेशक ने बताया कि जब SEBI ने पाया कि कंपनी ने SEBI एक्ट के तहत ज़रूरी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं लिया है, तो 2015 से उसे कानूनी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। SEBI ने कंपनी पर जनता से पैसे लेने पर रोक लगा दी।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में कई मामले चले। एक सदस्यीय आयोग ने भी विस्तृत जाँच-पड़ताल की और कंपनियों की संपत्तियाँ ज़ब्त कर लीं।
निवेशक ने कहा, "धोखाधड़ी का शिकार हुए निवेशकों को बाँटने के लिए पिछले साल से ही एक सरकारी बैंक में लगभग 270 करोड़ रुपये तैयार रखे गए हैं। हाई कोर्ट ने साफ़ तौर पर निर्देश दिया था कि यह रकम जल्द बाँटी जाए और मामले को ज़रूरी अहमियत दी जाए। हालाँकि, मदुरै की ट्रायल कोर्ट पिछले पाँच महीनों से मामले की सुनवाई टाल रही है।"
निवेशक ने आगे कहा कि ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए रजिस्ट्रेशन के बाद ही क्लेम का निपटारा किया जा सकता है। इस मामले के सभी पीड़ितों ने वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।
जिन लोगों ने अभी तक पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है, वे भी रजिस्ट्रेशन करा लेंगे अगर उन लोगों को पैसे जल्द मिल जाएँ जिन्होंने पहले ही रजिस्ट्रेशन करा लिया है। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसी स्थिति में, धोखाधड़ी करने वाली कंपनियों की बची हुई संपत्तियों की नीलामी की जानी चाहिए और फिर उससे मिलने वाली रकम बाकी निवेशकों में बांट दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "देरी के हर दिन, हर हफ़्ते और हर महीने का असर सिर्फ़ निवेशकों और उनके परिवारों पर पड़ता है, जो कम से कम 10 साल से अपने वाजिब हक़ का इंतज़ार कर रहे हैं।"
निवेशकों के एक समूह ने मदुरै में 'इकोनॉमिक ऑफ़ेंस विंग' (EOW) के सामने यही बातें रखीं; यह विंग अभी 'डिस्क स्कैम' (Disc scam) से जुड़े आपराधिक मामले की जांच कर रही है। उन्होंने IPC की धाराओं 406, 20, 120 B और 'तमिलनाडु प्रोटेक्शन ऑफ़ इंटरेस्ट्स ऑफ़ डिपॉज़िटर्स (इन फ़ाइनेंशियल एस्टैब्लिशमेंट्स) एक्ट' के तहत मामला दर्ज कराया था।
EOW यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि बताई गई बातों पर गौर किया जाएगा।





