
Tamil Nadu तमिलनाडु: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि नीदरलैंड से भारत को चोल काल की ऐतिहासिक कॉपर प्लेट्स मिलना पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि इस उपलब्धि से दुनिया भर में रहने वाला तमिल समुदाय अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की बड़ी वापसी बताया।
प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में पांच देशों की राजकीय यात्रा पर यूरोप के नीदरलैंड पहुंचे थे। इसी यात्रा के दौरान हेग शहर में एक विशेष समारोह का आयोजन किया गया, जहां भारत को चोल साम्राज्य के समय की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक वस्तुएं वापस सौंपी गईं। यह कार्यक्रम सांस्कृतिक सहयोग और ऐतिहासिक धरोहरों की वापसी के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस समारोह में चोल सम्राट राजा राज चोल और उनके पुत्र राजेंद्र चोल के शासनकाल से जुड़ी अनाइमंगलम कॉपर प्लेट्स भारत को औपचारिक रूप से लौटाई गईं। ये कॉपर प्लेट्स प्राचीन काल के प्रशासन, भूमि रिकॉर्ड और ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों का स्रोत मानी जाती हैं। इनका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व बहुत अधिक बताया जाता है, क्योंकि यह चोल साम्राज्य की शासन व्यवस्था और सामाजिक संरचना को समझने में मदद करती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कहा कि यह केवल वस्तुओं की वापसी नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत की पुनर्प्राप्ति है। उन्होंने कहा कि यह क्षण हर भारतीय के लिए गर्व से भर देने वाला है और विशेष रूप से तमिल संस्कृति और इतिहास से जुड़े लोगों के लिए यह अत्यंत भावनात्मक उपलब्धि है।
नीदरलैंड में आयोजित इस समारोह में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सांस्कृतिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया। इस दौरान ऐतिहासिक वस्तुओं की सुरक्षा, संरक्षण और अनुसंधान पर भी चर्चा हुई। भारत और नीदरलैंड के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयासों के तहत यह कदम एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
चोल साम्राज्य को भारतीय इतिहास में एक शक्तिशाली और समृद्ध राजवंश के रूप में जाना जाता है। इस साम्राज्य ने कला, वास्तुकला, प्रशासन और समुद्री व्यापार के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। ऐसे में चोल काल की कॉपर प्लेट्स का वापस भारत आना ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अपनी विरासत को वापस लाने और उसे संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले समय में भी विदेशों में मौजूद भारतीय ऐतिहासिक धरोहरों को वापस लाने के प्रयास जारी रहेंगे।
इस पूरी घटना को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, जिससे न केवल इतिहास से जुड़ी वस्तुएं वापस आई हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विरासत संरक्षण की छवि भी मजबूत हुई है।





