तमिलनाडू

फ़र्ज़ी डीड रजिस्ट्रेशन मामलों में होगी सख़्त कार्रवाई, दोषियों को नहीं मिलेगी राहत: Minister

Kavita2
19 July 2026 9:31 AM IST
फ़र्ज़ी डीड रजिस्ट्रेशन मामलों में होगी सख़्त कार्रवाई, दोषियों को नहीं मिलेगी राहत: Minister
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मदुरै : तमिलनाडु के ऊर्जा एवं कानून मंत्री सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने कहा है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान सामने आए फ़र्ज़ी डीड रजिस्ट्रेशन के मामलों की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिरों की ज़मीन, झीलों, तालाबों और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों के अवैध पंजीकरण से जुड़े मामलों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शनिवार को मदुरै में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मंत्री ने पलानी मंदिर की ज़मीन से जुड़े कथित घोटाले का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस प्रकरण में कई लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। इसलिए मामले की तह तक पहुंचना आवश्यक है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जा सके।

मंत्री ने कहा कि केवल पलानी मंदिर की ज़मीन ही नहीं, बल्कि पिछले पांच वर्षों के दौरान तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से मंदिरों की संपत्तियों, झीलों, तालाबों और अन्य सार्वजनिक भूमि के फ़र्ज़ी डीड रजिस्ट्रेशन की शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ाई है और अब इन सभी शिकायतों की गंभीरता से जांच करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने कहा कि सार्वजनिक संपत्तियां राज्य की धरोहर हैं और इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी या धार्मिक संस्थाओं की जमीन पर अवैध कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार इस प्रकार की अनियमितताओं के प्रति पूरी तरह सतर्क है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मानना कठिन है कि डीड रजिस्ट्रेशन विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतने बड़े पैमाने पर फ़र्ज़ी पंजीकरण संभव हो सकते हैं। इसलिए जांच केवल बाहरी लोगों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यदि विभागीय अधिकारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष होगी और किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को संरक्षण नहीं दिया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण, दस्तावेजों के सत्यापन और निगरानी प्रणाली को और प्रभावी बनाने जैसे उपायों पर भी काम किया जा सकता है, ताकि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों का पंजीकरण रोका जा सके।

उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि यदि किसी को मंदिर की भूमि, सरकारी जमीन, झील, तालाब या अन्य सार्वजनिक संपत्ति के फ़र्ज़ी डीड रजिस्ट्रेशन की जानकारी है, तो वह संबंधित अधिकारियों को इसकी शिकायत करे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रत्येक शिकायत की जांच की जाएगी और यदि शिकायत सही पाई गई तो तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी।

सी.टी.आर. निर्मल कुमार ने कहा कि सरकार जनता के सहयोग से सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा करना चाहती है। उन्होंने कहा कि लोगों की जागरूकता और समय पर दी गई सूचनाएं ऐसे मामलों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इसलिए नागरिकों को किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी प्रशासन तक पहुंचानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है और किसी भी प्रकार के भूमि घोटाले को गंभीर अपराध मानती है। चाहे मामला मंदिर की जमीन का हो, सरकारी भूमि का या किसी अन्य सार्वजनिक संपत्ति का, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उनका कहना था कि सरकार की प्राथमिकता सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा और लोगों का प्रशासन पर विश्वास बनाए रखना है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में मंत्री के इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के वर्षों में तमिलनाडु के विभिन्न जिलों से मंदिरों और सार्वजनिक भूमि के कथित फ़र्ज़ी पंजीकरण के कई मामले सामने आए हैं, जिन पर विपक्ष भी सरकार से कार्रवाई की मांग करता रहा है। ऐसे में सरकार की ओर से व्यापक जांच और कठोर कार्रवाई का आश्वासन इस मुद्दे को लेकर प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है।

फिलहाल, राज्य सरकार इन मामलों से संबंधित शिकायतों और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। जांच पूरी होने के बाद यदि किसी व्यक्ति, बिचौलिए या सरकारी अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने दोहराया है कि सार्वजनिक संपत्तियों के संरक्षण के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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