
Tamil Nadu तमिलनाडु: केंद्रीय पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और पर्यटन राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा है कि पेट्रोलियम कंपनियों के अधिकारियों से चर्चा कर पेट्रोल की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य आम जनता पर बढ़ते ईंधन खर्च के बोझ को कम करना है।
केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी मंगलवार को कोयंबटूर में एक बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। यह बैठक 8 जिला अधिकारियों के साथ एक कंसल्टेशन कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई थी। बैठक के बाद उन्होंने एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत की और ईंधन कीमतों को लेकर सरकार की स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार विचार-विमर्श किया जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम किया जा सके। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर तेल कीमतों में बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए कई प्रयास किए गए हैं, और आगे भी इसी दिशा में काम जारी रहेगा।
सुरेश गोपी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की प्राथमिकता जनता को महंगाई के दबाव से राहत देना है। सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जिससे ईंधन की कीमतों में अत्यधिक वृद्धि न हो और आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध जैसी वैश्विक घटनाएं ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि यह युद्ध कब समाप्त होगा, लेकिन पूरी दुनिया को इसके जल्द खत्म होने की उम्मीद करनी चाहिए।
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में हुए विकास कार्यों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और देश तेजी से सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मंत्री ने कहा कि सड़क, ऊर्जा, परिवहन और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर सुधार हुए हैं, जिससे देश की आर्थिक क्षमता मजबूत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि विकास के साथ-साथ आम नागरिकों को सुविधाएं भी बेहतर तरीके से उपलब्ध कराई जाएं।
ईंधन कीमतों को लेकर उठी चिंताओं के बीच मंत्री के इस बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि पेट्रोलियम कंपनियों के साथ समन्वय के बाद कीमतों में स्थिरता लाने की दिशा में कुछ ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।
फिलहाल सरकार और संबंधित विभाग इस मुद्दे पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार के प्रभाव को देश के भीतर सीमित किया जा सके और आम जनता को राहत दी जा सके।





