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Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई के पास मराईमलाईनगर में आयोजित प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायंस (PDA) की एक बड़ी चुनावी रैली में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने विपक्ष के नेता एडप्पादी के पलानीस्वामी के आरोपों का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने करीब 55 साल पुरानी एक घटना को याद करते हुए अपनी राजनीतिक यात्रा और प्रतिबद्धता को सामने रखा।
रैली को संबोधित करते हुए एम के स्टालिन ने कहा कि उन पर लगाए गए आरोपों को सही संदर्भ में देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विपक्ष द्वारा यह आरोप लगाया गया था कि कोविड-19 महामारी के दौरान वह जनता के बीच नहीं आए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों का उदाहरण दिया।
मुख्यमंत्री ने 1971 में कोंगु क्षेत्र में हुई DMK की एक मीटिंग को याद किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह केवल 18 साल के एक कार्यकर्ता के रूप में पार्टी से जुड़े थे और उस मीटिंग में शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि उस दौरान उन्होंने मंच से बोलने की अनुमति मांगी थी और उन्हें एक छोटा भाषण देने का मौका मिला था।
एम के स्टालिन ने बताया कि उस भाषण में उन्होंने भीड़ से कहा था कि वह तमिल भाषा और तमिल संस्कृति की रक्षा के लिए अपनी जान तक देने को तैयार हैं। उन्होंने इस घटना को अपनी राजनीतिक सोच और प्रतिबद्धता का आधार बताया और कहा कि वह हमेशा जनता और अपनी संस्कृति के साथ खड़े रहे हैं।
चेन्नई के पास हुई इस रैली में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा लंबे समय से जनता के साथ जुड़ी रही है और उन्होंने हर परिस्थिति में लोगों के बीच रहने का प्रयास किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच तथ्यों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अपने अनुभव और काम का हवाला देते हुए कहा कि जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी हमेशा प्राथमिकता रही है।
रैली में एम के स्टालिन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से भी अपील की कि वे एकजुट होकर काम करें और जनता तक सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि चुनावी माहौल में सकारात्मक तरीके से लोगों के बीच जाना जरूरी है।
एडप्पादी के पलानीस्वामी के आरोपों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने यह संकेत दिया कि उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता और कामकाज को उनके लंबे अनुभव के आधार पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पहचान केवल वर्तमान घटनाओं से नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा और संघर्ष से बनी है।
रैली के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने मुख्यमंत्री के भाषण का समर्थन किया और उनके पक्ष में नारे लगाए। इस आयोजन ने राज्य की राजनीति में चल रही बहस को और तेज कर दिया है।
कुल मिलाकर, चेन्नई के पास हुई इस रैली में एम के स्टालिन ने अपने पुराने अनुभवों का जिक्र कर वर्तमान राजनीतिक आरोपों का जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा, प्रतिबद्धता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति अपने रुख को सामने रखा।
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