
Tamil Nadu तमिलनाडु: श्रीलंका के सांसद और तमिल नेशनल काउंसिल के अध्यक्ष गजेंद्रकुमार पोन्नम्बलम के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को चेन्नई में कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं से मुलाकात की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य युद्ध के बाद श्रीलंका में ईलम तमिल समुदाय के सामने आ रही समस्याओं और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना था।
प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले चेन्नई के ग्रीनवे इलाके में स्थित तमिलनाडु के विपक्षी नेता उदयनिधि स्टालिन के आवास पर उनसे मुलाकात की। इस बैठक में दोनों पक्षों के बीच ईलम तमिलों की स्थिति, उनके सामाजिक-आर्थिक हालात और राजनीतिक अधिकारों पर विस्तार से बातचीत हुई। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि श्रीलंका में युद्ध के बाद के हालात में तमिल समुदाय अभी भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है और उनके पुनर्वास तथा अधिकारों की सुरक्षा को लेकर निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
इस प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख तमिल राजनीतिक दलों और संगठनों के नेता शामिल थे। इनमें डेमोक्रेटिक तमिल अरासु पार्टी के नेता के.वी. थावरसा, तमिल नेशनल ग्रीन मूवमेंट के नेता पी. ऐंगरनेसन, तमिल नेशनल फ्रंट के महासचिव एस. गजेंद्रन, तमिल नेशनल पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय समन्वयक डी. सुरेश, स्पीकर के. सुकेश और प्रचार सचिव एन. कंदीपन शामिल थे। सभी नेताओं ने एकजुट होकर ईलम तमिलों के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ऐतिहासिक रूप से ईलम तमिलों के अधिकारों के समर्थन में रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी की विचारधारा और परंपरा हमेशा से तमिल समुदाय के हितों के साथ जुड़ी रही है। उदयनिधि स्टालिन ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के ध्यान में लाएंगे और केंद्र सरकार तक तमिल समुदाय की चिंताओं को पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
प्रतिनिधिमंडल ने इस बातचीत के दौरान उम्मीद जताई कि तमिलनाडु की राजनीतिक पार्टियां श्रीलंका के तमिलों की समस्याओं को भारत और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रभावी तरीके से उठाने में भूमिका निभाएंगी। चर्चा में यह भी कहा गया कि ईलम तमिल समुदाय के पुनर्वास, शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
उदयनिधि स्टालिन ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि ईलम तमिलों की समस्याओं को लेकर उनकी पार्टी संवेदनशील है और इस विषय पर लगातार संवाद जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि तमिल समुदाय की एकजुटता और सहयोग से इन मुद्दों को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।
चेन्नई में हुई इस मुलाकात के बाद प्रतिनिधिमंडल ने वामपंथी दलों के नेताओं से भी बातचीत की। इसके तहत श्रीलंकाई राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI(M)) के राज्य सचिव पी. शनमुगम और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के राज्य सचिव एम. वीरपांडियन से उनके पार्टी मुख्यालय में मुलाकात की।
वामपंथी नेताओं के साथ हुई इस बैठक में भी मुख्य रूप से ईलम तमिलों के अधिकारों, उनके पुनर्वास और श्रीलंका में युद्ध के बाद की स्थिति पर चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने माना कि मानवाधिकार, समानता और न्याय जैसे मुद्दों पर लगातार संवाद और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
इस पूरी यात्रा और बैठकों को तमिल समुदाय के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संवाद के रूप में देखा जा रहा है। श्रीलंकाई तमिल नेताओं ने उम्मीद जताई कि भारत के राजनीतिक दलों के सहयोग से उनके मुद्दों को अधिक मजबूती से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाया जा सकेगा।
चेन्नई में हुई इस श्रृंखला की बैठकों ने एक बार फिर तमिलनाडु और श्रीलंका के तमिल समुदाय के बीच ऐतिहासिक और राजनीतिक संबंधों को चर्चा में ला दिया है। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वे भविष्य में भी ऐसे संवाद जारी रखेंगे ताकि ईलम तमिलों के अधिकारों और उनके हितों की रक्षा के लिए साझा प्रयास किए जा सकें।





