तमिलनाडू

Sri Lanka ने 12 मछुआरों की गिरफ्तारी अवधि बढ़ाई

Ratna Netam
8 May 2026 2:50 PM IST
Sri Lanka ने 12 मछुआरों की गिरफ्तारी अवधि बढ़ाई
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Tamil Nadu.तमिलनाडु: श्रीलंका की अदालत ने भारतीय मछुआरों की हिरासत अवधि बढ़ा दी है। 12 मछुआरों को कथित तौर पर देश की समुद्री सीमा उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में अधिकारियों ने कहा कि हिरासत बढ़ाने का फैसला जांच पूरी होने तक लिया गया है।
मछुआरों का कहना है कि वे भारतीय समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे थे, लेकिन खराब मौसम और नेविगेशन संबंधी समस्याओं के कारण गलती से श्रीलंकाई सीमा में प्रवेश कर गए। उनके परिवारों ने भारत और श्रीलंका दोनों सरकारों से जल्द कार्रवाई की मांग की है।
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि वे मामले की निगरानी कर रहे हैं और लगातार श्रीलंकाई अधिकारियों के संपर्क में हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि मछुआरों की सुरक्षा और जल्दी रिहाई उनकी प्राथमिकता है। विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले पर ध्यान देने की पुष्टि की है और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।
श्रीलंकाई अदालत ने हिरासत बढ़ाने के निर्णय में कहा कि मामले की कानूनी जांच अभी पूरी नहीं हुई है और सभी साक्ष्यों का मूल्यांकन आवश्यक है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मछुआरों के मानवाधिकारों का ध्यान रखा जाएगा और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री सीमाओं पर मछुआरों की गिरफ्तारी भारत और श्रीलंका के बीच लंबे समय से जारी मुद्दों में से एक है। इन घटनाओं से दोनों देशों के मत्स्य उद्योग और स्थानीय मछुआरों के जीवन पर असर पड़ता है। कई बार ऐसे मामलों में कूटनीतिक वार्ता और समझौते के माध्यम से मछुआरों को रिहा कराया गया है।
मछुआरों के परिवारों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और हिरासत बढ़ने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। उन्होंने मांग की कि दोनों सरकारें तत्काल हस्तक्षेप करें और मछुआरों को सुरक्षित वापस भारत लाया जाए।
भारत सरकार ने श्रीलंका के साथ मत्स्य अधिकार और समुद्री सीमाओं के मुद्दों पर नियमित बातचीत का संकेत दिया है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने और मछुआरों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा।
इस बीच, स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी हिरासत बढ़ाने पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि मछुआरों के अधिकारों और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
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