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सितंबर की ग्रीन टी लीफ कीमत घोषित नहीं होने से नीलगिरी के छोटे चाय उत्पादक परेशान

Kavita2
5 Oct 2026 12:02 PM IST
सितंबर की ग्रीन टी लीफ कीमत घोषित नहीं होने से नीलगिरी के छोटे चाय उत्पादक परेशान
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ऊटी: नीलगिरी में ग्रीन टी लीफ (GTL) की सितंबर महीने की औसत खरीद कीमत अब तक घोषित नहीं किए जाने को लेकर छोटे चाय उत्पादकों में चिंता बढ़ गई है। नॉलेज शेयरिंग एंड केयरिंग ट्रस्ट (KSCT) ने टी बोर्ड ऑफ इंडिया की ओर से सितंबर के लिए GTL की औसत खरीद कीमत जारी नहीं किए जाने पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि कीमत की घोषणा में देरी से नीलगिरी के हजारों छोटे चाय उत्पादकों (STGs) के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

KSCT के संस्थापक एस. पद्मनाभन ने इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि कूनूर स्थित टी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से आम तौर पर प्रत्येक महीने के अंत में नीलगिरी में ग्रीन टी लीफ की औसत खरीद कीमत घोषित की जाती है। छोटे चाय उत्पादक इस कीमत पर विशेष नजर रखते हैं, क्योंकि यह उन दरों के लिए महत्वपूर्ण पैमाना होती है, जिन पर चाय कारखाने उत्पादकों से GTL खरीदते हैं।

हर महीने कीमत की घोषणा पर रहती है नजर

नीलगिरी के छोटे चाय उत्पादकों के लिए ग्रीन टी लीफ की खरीद कीमत बेहद महत्वपूर्ण होती है। उत्पादक अपने खेतों में चाय की पत्तियां उगाकर उन्हें चाय कारखानों को सप्लाई करते हैं। इसके बाद इन्हीं पत्तियों का इस्तेमाल चाय के उत्पादन में किया जाता है।

ऐसे में टी बोर्ड की ओर से घोषित की जाने वाली औसत खरीद कीमत उत्पादकों के लिए एक अहम संदर्भ मानी जाती है। उत्पादक इस घोषणा के जरिए बाजार में GTL की खरीद से जुड़ी कीमतों का आकलन करते हैं। आम तौर पर महीने के अंत में कीमत घोषित होने की उम्मीद रहती है।

एस. पद्मनाभन के अनुसार, कूनूर स्थित टी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा नीलगिरी के लिए GTL की औसत खरीद कीमत घोषित की जाती है। सितंबर महीने के लिए यह घोषणा नहीं होने के कारण छोटे उत्पादकों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।

कीमत घोषित नहीं होने से असमंजस

सितंबर की औसत खरीद कीमत सामने नहीं आने से सबसे बड़ी चिंता यह है कि उत्पादकों को अपनी चाय पत्तियों की खरीद के लिए मिलने वाली कीमत का आकलन किस आधार पर करना चाहिए। छोटे चाय उत्पादक अपनी उपज चाय कारखानों को सप्लाई करते हैं और खरीद कीमत उनकी आय से सीधे जुड़ी होती है।

GTL की औसत खरीद कीमत की घोषणा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्पादकों और चाय कारखानों के बीच खरीद मूल्य को लेकर एक संदर्भ उपलब्ध कराती है। कीमत जारी होने में देरी से उत्पादकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।

KSCT ने इसी मुद्दे को उठाते हुए टी बोर्ड ऑफ इंडिया से सितंबर महीने की औसत खरीद कीमत को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि हजारों छोटे चाय उत्पादक इस घोषणा का इंतजार कर रहे हैं।

छोटे चाय उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण है GTL

नीलगिरी में बड़ी संख्या में छोटे चाय उत्पादक चाय की खेती से जुड़े हुए हैं। इन उत्पादकों के लिए चाय की पत्तियों की बिक्री से मिलने वाली राशि महत्वपूर्ण आय का स्रोत होती है। वे अपनी उपज को चाय कारखानों तक पहुंचाते हैं, जहां इसे आगे की प्रक्रिया के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में GTL की खरीद कीमत की भूमिका अहम होती है। इसलिए टी बोर्ड की ओर से घोषित औसत कीमत पर उत्पादकों की नजर रहती है। महीने के हिसाब से कीमतों की जानकारी मिलने से उत्पादकों को अपनी उपज की बिक्री और संभावित आय का अनुमान लगाने में मदद मिलती है।

सितंबर महीने की कीमत की घोषणा नहीं होने से यही प्रक्रिया प्रभावित होती दिखाई दे रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कीमत घोषित करने में देरी का कारण क्या है।

KSCT ने जताई चिंता

नॉलेज शेयरिंग एंड केयरिंग ट्रस्ट ने इस मामले को छोटे चाय उत्पादकों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उठाया है। KSCT के संस्थापक एस. पद्मनाभन ने कहा कि कूनूर स्थित टी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से हर महीने के अंत में कीमत की घोषणा किए जाने की परंपरा रही है।

उन्होंने कहा कि छोटे उत्पादक इस कीमत का इंतजार करते हैं और इसे चाय कारखानों द्वारा GTL के लिए भुगतान की जाने वाली राशि के एक अहम पैमाने के तौर पर देखते हैं। ऐसे में सितंबर की कीमत घोषित नहीं होने से उत्पादकों के बीच सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।

घोषणा का इंतजार

फिलहाल नीलगिरी के छोटे चाय उत्पादकों की नजर टी बोर्ड ऑफ इंडिया की ओर से सितंबर महीने की औसत GTL खरीद कीमत की घोषणा पर है। कीमत सामने आने के बाद उत्पादकों को पिछले महीने की खरीद दर को लेकर अधिक स्पष्टता मिल सकेगी।

छोटे चाय उत्पादकों के लिए कीमत की जानकारी समय पर मिलना इसलिए जरूरी है, क्योंकि उनकी उपज की बिक्री और उससे मिलने वाली आय इसी बाजार व्यवस्था से जुड़ी है। सितंबर की कीमत घोषित नहीं होने के कारण फिलहाल उत्पादकों के बीच असमंजस बना हुआ है।

KSCT ने इस मामले को सामने रखते हुए कीमत की घोषणा को लेकर स्पष्टता की जरूरत बताई है। अब यह देखना होगा कि टी बोर्ड ऑफ इंडिया की ओर से सितंबर की औसत खरीद कीमत कब जारी की जाती है और इसके बाद छोटे चाय उत्पादकों की चिंता किस हद तक दूर होती है।

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