
चेन्नई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की युवा पीढ़ी, खासकर जेन Z और जेन अल्फा से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया है। उन्होंने युवाओं से कहा कि उन्हें केवल यह सोचने तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि देश उनके लिए क्या कर सकता है, बल्कि उन्हें यह सवाल पूछना चाहिए कि वे अपनी शिक्षा, प्रतिभा और कौशल के जरिए देश के लिए क्या कर सकते हैं।
चेन्नई में डॉ. एम.जी.आर. एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के 36वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने युवा स्नातकों से नेतृत्व की जिम्मेदारी संभालने और राष्ट्रहित को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी के पास देश की दिशा को प्रभावित करने की क्षमता है और आने वाले वर्षों में उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभानी होंगी।
युवाओं से नेतृत्व की भूमिका निभाने का आह्वान
निर्मला सीतारमण ने कहा कि जेन Z और जेन अल्फा तकनीक, नवाचार और बदलती दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली पीढ़ियां हैं। इन पीढ़ियों के सामने अवसर भी बड़े हैं और चुनौतियां भी। ऐसे में युवाओं को अपनी क्षमता को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
उन्होंने युवा स्नातकों से कहा कि विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त करना उनके जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है। अब उनके सामने अपने ज्ञान और कौशल को समाज और देश के विकास से जोड़ने की जिम्मेदारी है।
वित्त मंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे समस्याओं को पहचानने और उनके समाधान खोजने की क्षमता विकसित करें। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे युवाओं की जरूरत है, जो केवल अवसरों की तलाश न करें, बल्कि नए अवसर पैदा करने की दिशा में भी काम करें।
‘देश आपके लिए क्या कर सकता है’ से आगे सोचें
सीतारमण ने अपने संबोधन में युवाओं की सोच और दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि युवाओं को बार-बार यह सवाल नहीं करना चाहिए कि देश उनके लिए क्या कर सकता है। इसके बजाय उन्हें खुद से पूछना चाहिए कि वे देश के विकास में क्या योगदान दे सकते हैं।
उनके मुताबिक, राष्ट्र निर्माण केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें हर नागरिक की भूमिका होती है। युवा वर्ग देश की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है और उसकी ऊर्जा, प्रतिभा तथा नई सोच का उपयोग देशहित में किया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि युवाओं की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को सरकार समझती है। देश उनके सपनों और विचारों को सुनने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ युवाओं को अपनी जिम्मेदारियां भी स्वीकार करनी होंगी।
अधिकारों के साथ नागरिक कर्तव्य भी जरूरी
वित्त मंत्री ने युवा स्नातकों को नागरिक कर्तव्यों के महत्व से भी अवगत कराया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपने अधिकारों की जानकारी होने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए।
सीतारमण के अनुसार, जिम्मेदार नागरिक होने का अर्थ केवल कानूनों का पालन करना नहीं है। समाज के प्रति संवेदनशील होना, जरूरतमंदों की मदद करना, सार्वजनिक संसाधनों का सम्मान करना, पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करना भी नागरिक कर्तव्यों का हिस्सा है।
उन्होंने युवाओं से कहा कि वे अपने पेशेवर जीवन में आगे बढ़ते हुए सामाजिक सरोकारों को भी महत्व दें। उनकी सफलता का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित न रहे, बल्कि उसका सकारात्मक प्रभाव समाज और देश पर भी पड़े।
तकनीकी क्षमता को देशहित से जोड़ने की अपील
जेन Z और जेन अल्फा तकनीकी रूप से बेहद सक्षम पीढ़ियां हैं। डिजिटल तकनीक, इंटरनेट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक संचार माध्यमों ने इन युवाओं के सीखने और काम करने के तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है।
सीतारमण ने युवाओं से अपनी तकनीकी क्षमता और रचनात्मक सोच का इस्तेमाल देश की चुनौतियों के समाधान के लिए करने की अपील की। उन्होंने संकेत दिया कि तकनीक का उपयोग केवल व्यक्तिगत सुविधा या करियर के लिए नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक बदलाव के लिए भी किया जा सकता है।
उन्होंने युवाओं को नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया। बदलती अर्थव्यवस्था में युवाओं के लिए रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर पैदा करने की भी बड़ी संभावना है।
युवाओं की आकांक्षाओं को सुनने को तैयार देश
वित्त मंत्री ने कहा कि आज का भारत युवाओं की आकांक्षाओं को सुनने के लिए तैयार है। नई पीढ़ी बेहतर शिक्षा, रोजगार, तकनीकी अवसर, उद्यमिता और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के अवसर चाहती है। इन आकांक्षाओं को समझना और उनके अनुरूप अवसर तैयार करना जरूरी है।
हालांकि, उन्होंने युवाओं को यह भी याद दिलाया कि किसी भी समाज में अधिकार और जिम्मेदारियां एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। यदि युवा देश से अवसरों और सुविधाओं की अपेक्षा करते हैं तो उन्हें देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को भी समझना होगा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण कोई एक दिन या एक सरकार की प्रक्रिया नहीं है। यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है, जिसमें प्रत्येक पीढ़ी की भूमिका होती है। वर्तमान युवा पीढ़ी को भी अपने योगदान के जरिए आने वाली पीढ़ियों के लिए मजबूत आधार तैयार करना होगा।
डिग्री के साथ नई जिम्मेदारियों की शुरुआत
दीक्षांत समारोह में डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों के लिए सीतारमण का संदेश विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से निकलने के बाद युवाओं के सामने अब वास्तविक दुनिया की चुनौतियां होंगी। उन्हें अपने ज्ञान को व्यावहारिक जीवन में इस्तेमाल करना होगा।
उन्होंने युवाओं को असफलताओं से सीखने और लगातार आगे बढ़ने की सलाह दी। उनके मुताबिक, किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए केवल डिग्री पर्याप्त नहीं है। उसके साथ जिम्मेदारी, अनुशासन, नवाचार और समाज के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी है।
कुल मिलाकर, डॉ. एम.जी.आर. एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के 36वें दीक्षांत समारोह में निर्मला सीतारमण का संबोधन युवा पीढ़ी के लिए जिम्मेदारी, नेतृत्व और राष्ट्रहित का संदेश लेकर आया। उन्होंने जेन Z और जेन अल्फा से अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ देश के प्रति योगदान पर भी ध्यान देने की अपील की। उनका संदेश स्पष्ट था कि युवा केवल यह न पूछें कि देश उन्हें क्या दे सकता है, बल्कि यह भी सोचें कि अपनी शिक्षा, प्रतिभा, मेहनत और नवाचार के जरिए वे देश को क्या दे सकते हैं।





