तमिलनाडू

सेंगोल बनाने वाले वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन, पीएम मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल ने जताया शोक

Kavita2
21 Oct 2026 5:22 PM IST
सेंगोल बनाने वाले वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन, पीएम मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल ने जताया शोक
x

चेन्नई। तमिलनाडु के प्रसिद्ध स्वर्णकार और ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण से जुड़े वुम्मिदी एथिराजुलु का निधन हो गया है। उनके निधन से पारंपरिक स्वर्णकारी और हस्तशिल्प जगत में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु के राज्यपाल ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। एथिराजुलु का नाम उस ऐतिहासिक सेंगोल से जुड़ा रहा है, जिसे भारत की स्वतंत्रता और सत्ता हस्तांतरण की परंपरा के संदर्भ में विशेष पहचान मिली। वर्ष 2023 में नए संसद भवन में सेंगोल स्थापित किए जाने के बाद इसके निर्माण से जुड़े कारीगरों और उनके परिवारों की भूमिका एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में आई थी।

ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण से जुड़ा था नाम

वुम्मिदी एथिराजुलु तमिलनाडु की पारंपरिक स्वर्णकारी कला से जुड़े प्रतिष्ठित कारीगर थे। उनका संबंध उस वुम्मिदी परिवार से था, जिसने ऐतिहासिक सेंगोल के निर्माण में भूमिका निभाई थी।

सेंगोल तमिल परंपरा में राजसत्ता, न्याय और शासन की जिम्मेदारी से जुड़ा प्रतीक माना जाता है। इसकी बनावट में पारंपरिक शिल्पकला और धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों का विशेष महत्व होता है।

एथिराजुलु के निधन के साथ इस ऐतिहासिक शिल्प परंपरा से जुड़े एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व का अध्याय समाप्त हो गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वुम्मिदी एथिराजुलु के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

एथिराजुलु का नाम भारतीय सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्पकला के संरक्षण से जुड़ा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान सेंगोल को विशेष स्थान दिया गया था।

उस समय सेंगोल के ऐतिहासिक महत्व और इसे बनाने वाले कारीगरों के योगदान पर व्यापक चर्चा हुई थी।

एथिराजुलु के निधन पर प्रधानमंत्री की शोक संवेदना इस सांस्कृतिक विरासत से उनके जुड़ाव को भी रेखांकित करती है।

तमिलनाडु के राज्यपाल ने भी दी श्रद्धांजलि

तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने भी एथिराज के निधन पर शोक जताया। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी उनके निधन पर संवेदना व्यक्त की। एथिराज का बुधवार, 21 अक्टूबर को चेन्नई में निधन हुआ। समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, वह 99 वर्ष के थे और उनका निधन वृद्धावस्था से जुड़ी वजहों से हुआ।

वर्ष 1947 में तैयार किया गया था ऐतिहासिक सेंगोल

वुम्मिदी एथिराज का नाम वर्ष 1947 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को भेंट किए गए सेंगोल के निर्माण से जुड़ा है।

इस ऐतिहासिक राजदंड को तमिलनाडु के पारंपरिक कारीगरों ने तैयार किया था। सेंगोल का संबंध तमिल संस्कृति और न्यायपूर्ण शासन की अवधारणा से माना जाता है।

भारत की स्वतंत्रता के समय नेहरू को यह राजदंड भेंट किया गया था। दशकों बाद वर्ष 2023 में इसे नए संसद भवन में स्थापित किया गया।

सेंगोल को सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक मानने संबंधी सरकारी व्याख्या पर इतिहासकारों के बीच अलग-अलग मत भी रहे हैं। हालांकि, इसके निर्माण में वुम्मिदी परिवार की शिल्पकारी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री से हुई थी मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने शोक संदेश में वर्ष 2023 की मुलाकात को भी याद किया।

उन्होंने बताया कि नए संसद भवन में सेंगोल स्थापित किए जाने के दौरान उन्हें वुम्मिदी एथिराज से मिलने और देश की संस्कृति में उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त करने का अवसर मिला था।

प्रधानमंत्री ने एथिराज की शिल्पकला को भारत की समृद्ध परंपराओं और राष्ट्रीय यात्रा के बीच महत्वपूर्ण संबंध बताया।

उन्होंने एथिराज के परिवार और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।

पारंपरिक स्वर्णकारी कला की बड़ी पहचान

वुम्मिदी एथिराज चेन्नई के प्रतिष्ठित वुम्मिदी बंगारू ज्वैलर्स परिवार से जुड़े थे। यह परिवार लंबे समय से आभूषण निर्माण और पारंपरिक स्वर्णकारी कला के लिए जाना जाता है।

एथिराज ने धातु शिल्प और आभूषण निर्माण की विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनके जीवन का सबसे चर्चित अध्याय ऐतिहासिक सेंगोल का निर्माण रहा। यह राजदंड भारतीय इतिहास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण कलाकृति के रूप में पहचाना जाता है।

शिल्पकला की विरासत हमेशा रहेगी याद

वुम्मिदी एथिराज का निधन भारतीय पारंपरिक शिल्पकला जगत के लिए एक महत्वपूर्ण क्षति है।

उनकी पहचान ऐसे कारीगर के रूप में रही, जिनका काम देश के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ गया।

वर्ष 1947 में नेहरू को भेंट किए गए सेंगोल के निर्माण से लेकर 2023 में नए संसद भवन में उसकी स्थापना तक, इस ऐतिहासिक राजदंड की यात्रा में एथिराज का नाम प्रमुखता से याद किया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है। एथिराज की कारीगरी और पारंपरिक स्वर्णकारी कला में उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

Next Story