
Tamil Nadu तमिलनाडु: नाम तमिल पार्टी के चीफ कोऑर्डिनेटर सीमन ने तमिलनाडु सरकार पर सरकारी अस्पतालों में लापरवाही के मामलों को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और उपचार व्यवस्था में लगातार अनदेखी हो रही है, जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए।
शुक्रवार को जारी अपने बयान में सीमन ने रामनाथपुरम जिले के पालकराई गांव की एक महिला तमिलचेलवी के मामले का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि तमिलचेलवी को नेज़ल सेप्टम सर्जरी के लिए एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन सर्जरी के बाद से वह बेहोश हैं। सीमन ने आरोप लगाया कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन इस मामले में कोई स्पष्ट जानकारी देने से इनकार कर रहा है, जो बेहद निंदनीय है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर स्थिति को दर्शाती हैं। सीमन के अनुसार, सरकारी अस्पतालों में लापरवाही और गलत इलाज की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता में चिंता बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से मांग की कि अस्पतालों में साफ-सफाई, सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाए।
सीमन ने यह भी कहा कि मौजूदा सरकार पिछली सरकारों की गलतियों को दोहरा रही है, जो जनता के भरोसे के साथ अन्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संस्थानों में सुधार की उम्मीद के साथ जनता ने वोट दिया था, लेकिन स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं दिख रहा है।
अपने बयान में उन्होंने आगे कहा कि सरकारी अस्पतालों में घटिया दवाओं और इलाज की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भी इसी तरह की समस्याएं देखी जा रही हैं, जहां सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं।
सीमन ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए, तो आम लोगों का भरोसा सरकारी व्यवस्था से उठ सकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे बुनियादी क्षेत्रों में सुधार सबसे प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने सरकार से अपील की कि सभी सरकारी अस्पतालों की स्वतंत्र जांच कराई जाए और लापरवाही के मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही मरीजों की सुरक्षा और बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
फिलहाल इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल में चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों की ओर से भी सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस बयान पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।





