
चेन्नई: तमिलनाडु में लगातार बढ़ते तापमान और लू (हीट वेव) की आशंका को देखते हुए राज्य का स्कूल शिक्षा विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग ने राज्य के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों (हेड टीचरों) को आवश्यक एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भीषण गर्मी का असर बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर न्यूनतम पड़े।
इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक एस. कन्नप्पन ने सभी जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को एक विस्तृत परिपत्र (सर्कुलर) जारी किया है। इसमें कहा गया है कि मौसम विभाग द्वारा राज्य के कई हिस्सों में तापमान बढ़ने और लू जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना व्यक्त की गई है। ऐसे में सभी स्कूल प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी होगी और छात्रों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा।
सर्कुलर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्कूल परिसर में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। प्रधानाध्यापक यह सुनिश्चित करें कि स्कूल के सभी पेयजल केंद्र सुचारु रूप से कार्य कर रहे हों और बच्चों को समय-समय पर पानी पीने के लिए प्रेरित किया जाए। लंबे समय तक प्यासे रहने से शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो सकती है, जिससे चक्कर आना, थकान और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि अत्यधिक गर्मी के समय विद्यार्थियों को लंबे समय तक खुले मैदान में न रखा जाए। सुबह की प्रार्थना सभा, खेलकूद गतिविधियां, शारीरिक शिक्षा की कक्षाएं तथा अन्य बाहरी कार्यक्रमों को मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सीमित किया जाए या आवश्यक होने पर स्थगित कर दिया जाए। यदि किसी गतिविधि का आयोजन करना अनिवार्य हो, तो उसे अपेक्षाकृत ठंडे समय में आयोजित करने की सलाह दी गई है।
प्रधानाध्यापकों से यह भी कहा गया है कि शिक्षक विद्यार्थियों में लू के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने के लिए सतर्क रहें। यदि किसी छात्र को अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, तेज बुखार, कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत छायादार स्थान पर ले जाकर प्राथमिक उपचार दिया जाए और आवश्यकता पड़ने पर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में भेजा जाए। साथ ही अभिभावकों को तुरंत सूचना देने के भी निर्देश दिए गए हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को हल्के रंग के सूती कपड़े पहनकर आने की सलाह देने को भी कहा है। इसके अलावा, बच्चों को पानी की बोतल साथ लाने, समय-समय पर पानी पीने तथा धूप में अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने के लिए जागरूक करने पर जोर दिया गया है। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कक्षा में छात्रों को गर्मी से बचाव के सरल और प्रभावी उपायों के बारे में जानकारी दें।
सर्कुलर में स्कूलों को यह सुनिश्चित करने के लिए भी कहा गया है कि कक्षाओं में पर्याप्त वेंटिलेशन हो। जहां संभव हो, पंखों की नियमित जांच की जाए और बिजली आपूर्ति में किसी प्रकार की समस्या होने पर तुरंत संबंधित विभाग से संपर्क किया जाए। यदि किसी स्कूल में पेयजल या बिजली की व्यवस्था प्रभावित होती है, तो उसकी जानकारी तत्काल उच्च अधिकारियों को देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विभाग ने विशेष रूप से छोटे बच्चों, दिव्यांग विद्यार्थियों तथा पहले से किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे छात्रों पर अतिरिक्त ध्यान देने के लिए कहा है। ऐसे विद्यार्थियों की नियमित निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अतिरिक्त आराम देने की सलाह भी दी गई है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य के कई जिलों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण बच्चों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में स्कूलों द्वारा समय रहते सावधानी बरतना बेहद आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि गर्मी के मौसम में बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी, ताजे फल और हल्का भोजन दिया जाए तथा उन्हें लंबे समय तक धूप में रहने से बचाया जाए।
अभिभावकों से भी अपील की गई है कि वे अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय पर्याप्त पानी, टोपी या छाता जैसी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराएं। यदि किसी बच्चे की तबीयत पहले से खराब हो या उसे बुखार, उल्टी अथवा अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही हो, तो उसे आराम करने दें और चिकित्सक की सलाह के बाद ही स्कूल भेजें।
स्कूल शिक्षा विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इन दिशा-निर्देशों के पालन की नियमित समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी स्कूल छात्रों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं लागू करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया जा सकता है।
फिलहाल विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह परिपत्र एहतियाती कदम के रूप में जारी किया गया है, ताकि संभावित हीट वेव की स्थिति में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की प्रभावी सुरक्षा की जा सके। विभाग ने सभी स्कूलों से अपील की है कि वे प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी गंभीरता से पालन करें और छात्रों के लिए सुरक्षित एवं स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण बनाए रखें।





