
चेन्नई: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की शिक्षाविद और प्रोफेसर जोया हसन ने गुरुवार को कहा कि भारत में शैक्षणिक स्वतंत्रता के खिलाफ खतरों में तेजी देखी गई है।
लोयोला कॉलेज में ‘भारत में उच्च शिक्षा की पुनर्कल्पना’ पर आयोजित एक सम्मेलन में बोलते हुए हसन ने कहा, “भारत में शैक्षणिक स्वतंत्रता, मुक्त भाषण, डिजिटल अधिकारों के खिलाफ खतरों में तेजी देखी गई है और ऑनलाइन ट्रोलिंग और उत्पीड़न में वृद्धि हुई है। इन सबके कारण लोकतांत्रिक समाज से जुड़ी स्वतंत्र जांच का क्षरण हुआ है।”
हसन ने कहा कि शैक्षणिक स्वतंत्रता, जिसका अर्थ है विद्वानों, शिक्षकों की आलोचनात्मक जांच करने, बिना किसी प्रतिबंध, सेंसर या हस्तक्षेप के किसी भी विचार पर विचार-विमर्श करने की स्वतंत्रता, ज्ञान के उत्पादन के लिए आवश्यक है।
हसन ने कहा, “भारत में उच्च शिक्षा जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, वह नव-उदारवाद और हिंदुत्व विचारधाराओं के अभिसरण का प्रतिनिधित्व करती है।”





