
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में 13 मई को हुए विश्वास मत की जांच की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपों में कोई दम नहीं था।
के.के. रमेश की याचिका को खारिज करते हुए, जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि याचिका "अस्पष्ट, बेबुनियाद और हल्के-फुल्के आरोपों" पर आधारित थी और इसके समर्थन में कोई सबूत नहीं था।
कोर्ट ने कहा, "संवैधानिक प्रक्रियाओं के खिलाफ गंभीर आरोप तथ्यों पर आधारित होने चाहिए।" इसके साथ ही कोर्ट ने बिना कोई और निर्देश दिए याचिका खारिज कर दी।
रमेश ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और तमिलनाडु विधानसभा में 13 मई को हुए विश्वास मत के दौरान कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की CBI जांच की मांग की थी। उन्होंने जांच पूरी होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की भी मांग की थी।





