तमिलनाडू

गगनयान मिशन में सुरक्षा सर्वोपरि K सिवन ने बताई बड़ी चुनौती

Ratna Netam
3 Oct 2026 6:06 PM IST
गगनयान मिशन में सुरक्षा सर्वोपरि K सिवन ने बताई बड़ी चुनौती
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नई दिल्ली। भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम **गगनयान** को लेकर इसरो के पूर्व चेयरमैन के. सिवन ने शनिवार को अहम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा कि मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए ऐसी तकनीक और ऑपरेशनल सिस्टम विकसित करना जरूरी है, जिसमें केवल बेहतरीन प्रदर्शन पर ध्यान न हो, बल्कि **मानव सुरक्षा, भरोसेमंदता और गुणवत्ता** को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उनके मुताबिक, गगनयान पारंपरिक विमानन तकनीक और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के कई पहलुओं का संयोजन है, इसलिए इसकी तैयारी सामान्य अंतरिक्ष मिशनों से अलग और अधिक जटिल है।के. सिवन ने गगनयान कार्यक्रम के उद्देश्य और उससे जुड़ी तकनीकी चुनौतियों पर चर्चा करते हुए कहा कि मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला मिशन बेहद उच्च स्तर की विश्वसनीयता की मांग करता है। इसमें रॉकेट से लेकर अंतरिक्ष यान, जीवन-समर्थन प्रणाली, संचार, नियंत्रण और वापसी की पूरी प्रक्रिया तक हर स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करनी होती है।
करीब 400 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाएगा मिशन
गगनयान भारत का मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम है। इसके तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की निचली कक्षा यानी **Low Earth Orbit (LEO)** में भेजने और सुरक्षित रूप से वापस पृथ्वी पर लाने का लक्ष्य है। के. सिवन के अनुसार, मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी से करीब **400 किलोमीटर ऊपर** की कक्षा में ले जाया जाना है।मानव मिशन में केवल अंतरिक्ष यान को कक्षा में पहुंचाना ही चुनौती नहीं है। अंतरिक्ष यात्रियों को वहां सुरक्षित रखना और फिर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पृथ्वी पर वापस लाना भी उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। वापसी के दौरान अंतरिक्ष यान को पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करना होता है। इस चरण में अत्यधिक तापमान और तेज गति जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
मानव मिशन में बदल जाती हैं प्राथमिकताएं
के. सिवन ने इस बात पर जोर दिया कि मानव अंतरिक्ष उड़ान और सामान्य उपग्रह मिशन के बीच बड़ा अंतर होता है। उपग्रह मिशन में किसी सिस्टम की खराबी से मिशन या उपकरण प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन मानव मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सीधे दांव पर होती है।इसी वजह से गगनयान के लिए डिजाइन किए जा रहे सिस्टम में **विश्वसनीयता और सुरक्षा** को विशेष महत्व देना होगा। किसी भी तकनीकी प्रणाली को कई संभावित परिस्थितियों में परखा जाना जरूरी है। मिशन के दौरान किसी एक सिस्टम में समस्या आने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध होनी चाहिए।मानव अंतरिक्ष उड़ान में जीवन-समर्थन प्रणाली की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। अंतरिक्ष यात्रियों को सीमित स्थान में लंबे समय तक सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना होता है। इसके लिए ऑक्सीजन, तापमान, दबाव और अन्य आवश्यक परिस्थितियों को नियंत्रित रखने वाली प्रणालियों की जरूरत होती है।
विमान और अंतरिक्ष तकनीक का संयोजन
के. सिवन ने गगनयान को पारंपरिक एयरक्राफ्ट और स्पेस टेक्नोलॉजी का मिश्रण बताया। इसका कारण यह है कि मानव अंतरिक्ष मिशन में विमानन क्षेत्र से जुड़ी कई अवधारणाओं और अंतरिक्ष तकनीक को एक साथ काम करना होता है।रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष यान को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने के बाद उसके संचालन के लिए अलग तकनीकी प्रणालियां काम करती हैं। वहीं पृथ्वी पर वापस लौटते समय अंतरिक्ष यान को नियंत्रित तरीके से वातावरण में प्रवेश करना होता है और फिर सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करनी होती है।इस पूरी प्रक्रिया में नेविगेशन, गाइडेंस और कंट्रोल सिस्टम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसके अलावा अंतरिक्ष यात्रियों और मिशन कंट्रोल के बीच लगातार संचार बनाए रखना भी जरूरी है।
अंतरिक्ष यात्रियों से पहले लंबी तकनीकी तैयारी
के. सिवन ने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेजने से पहले व्यापक तकनीकी तैयारी की आवश्यकता है। मानव मिशन में किसी भी चरण को केवल अनुमान या सीमित परीक्षण के आधार पर आगे नहीं बढ़ाया जा सकता।गगनयान की तैयारी में रॉकेट, क्रू मॉड्यूल और उससे जुड़ी विभिन्न प्रणालियों का परीक्षण शामिल है। मिशन के महत्वपूर्ण चरणों में संभावित आपात स्थिति से निपटने की क्षमता को भी जांचना जरूरी है।मानव अंतरिक्ष उड़ान में **Crew Escape System** जैसी व्यवस्था भी अहम होती है। यदि प्रक्षेपण के दौरान किसी गंभीर समस्या की स्थिति पैदा होती है तो अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रूप से रॉकेट से अलग करने और उन्हें वापस पृथ्वी तक पहुंचाने की क्षमता मिशन की सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।
भरोसेमंद सिस्टम पर जोर
मानव अंतरिक्ष मिशन की सफलता केवल रॉकेट की क्षमता या अधिकतम प्रदर्शन से तय नहीं होती। इसमें प्रत्येक सिस्टम की विश्वसनीयता महत्वपूर्ण होती है। यही कारण है कि गगनयान की तैयारी में बार-बार परीक्षण और अलग-अलग परिस्थितियों में सिस्टम की क्षमता जांचने पर जोर दिया जा रहा है।के. सिवन के मुताबिक, मानव मिशन के लिए ऐसी तकनीक विकसित करनी होगी जो अपेक्षित परिस्थितियों के साथ-साथ अप्रत्याशित स्थितियों में भी काम कर सके। इसके लिए डिजाइन से लेकर निर्माण और परीक्षण तक गुणवत्ता के उच्च मानकों को बनाए रखना जरूरी है।भारत के लिए गगनयान केवल एक अंतरिक्ष मिशन नहीं है, बल्कि देश की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता विकसित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस कार्यक्रम से भविष्य में भारत की मानव अंतरिक्ष गतिविधियों, अंतरिक्ष स्टेशन और अन्य गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए तकनीकी आधार तैयार करने में मदद मिल सकती है।गगनयान के जरिए भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिन्होंने अपने अंतरिक्ष यात्रियों को स्वदेशी तकनीक के जरिए अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता विकसित की है। हालांकि, के. सिवन की बातों से स्पष्ट है कि इस लक्ष्य तक पहुंचने में सबसे महत्वपूर्ण पहलू **सुरक्षित, भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण मानव अंतरिक्ष उड़ान प्रणाली तैयार करना** है।
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