तमिलनाडू

तमिलनाडु में बदला नियम तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मिलेगा मातृत्व लाभ

Ratna Netam
18 Aug 2026 9:16 PM IST
तमिलनाडु में बदला नियम तीसरे बच्चे के जन्म पर भी मिलेगा मातृत्व लाभ
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चेन्नई। तमिलनाडु की मुख्यमंत्री थलपति विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने महिला कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। राज्य सरकार ने घोषणा की है कि अब सरकारी क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं को **तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिनों यानी पूरे एक साल का मातृत्व अवकाश** दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले को कामकाजी महिलाओं के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है।
इस फैसले के बाद तीसरे बच्चे के जन्म को लेकर मातृत्व अवकाश के नियमों में बड़ा बदलाव होगा। पहले कई जगहों पर तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश को लेकर अलग-अलग नियम लागू थे, लेकिन अब तमिलनाडु सरकार ने इसे पहले और दूसरे बच्चे के समान करने का निर्णय लिया है।
महिला कर्मचारियों के हित में बड़ा कदम
सरकार का कहना है कि मातृत्व अवकाश का उद्देश्य केवल छुट्टी देना नहीं बल्कि मां और नवजात शिशु के स्वास्थ्य की सुरक्षा करना है। बच्चे के जन्म के बाद शुरुआती समय में मां को आराम, देखभाल और बच्चे के साथ समय बिताने की जरूरत होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए तमिलनाडु सरकार ने यह फैसला लिया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से महिला कर्मचारियों को अपने परिवार और नौकरी के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
तीसरे बच्चे पर भी मिलेगा 365 दिन का अवकाश
नए फैसले के तहत अब महिला सरकारी कर्मचारियों को तीसरे बच्चे के जन्म पर भी **एक साल का मातृत्व अवकाश** मिलेगा। इससे पहले तीसरे बच्चे को लेकर अलग नियमों और सीमाओं को लेकर कई बार विवाद सामने आते रहे हैं।
सरकार के इस फैसले से उन महिला कर्मचारियों को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जो तीसरी बार मां बनने जा रही हैं और नौकरी के साथ परिवार की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं।
महिलाओं की सुविधा और स्वास्थ्य पर जोर
मातृत्व अवकाश किसी भी महिला कर्मचारी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। बच्चे के जन्म के बाद मां और बच्चे दोनों की देखभाल के लिए पर्याप्त समय मिलना जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय का मातृत्व अवकाश महिलाओं के स्वास्थ्य, नवजात शिशु की देखभाल और परिवार के मानसिक संतुलन के लिए फायदेमंद होता है।
पहले भी उठ चुका है तीसरे बच्चे के अवकाश का मुद्दा
देश के कई राज्यों में तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश को लेकर समय-समय पर बहस होती रही है। कुछ मामलों में अदालतों ने भी कहा है कि मातृत्व लाभ को केवल बच्चों की संख्या के आधार पर सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने भी एक मामले में मातृत्व लाभ से जुड़े अधिकारों पर विचार करते हुए कहा था कि महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को व्यापक दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए।
सरकार की महिला केंद्रित नीति का हिस्सा
थलपति विजय सरकार की ओर से यह फैसला महिलाओं से जुड़े कल्याणकारी कदमों के तहत देखा जा रहा है। इससे पहले भी सरकार की नीतियों में महिला सुरक्षा, आर्थिक सहायता और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, महिला कर्मचारियों को राहत देने वाला यह फैसला सरकार की छवि को भी मजबूत कर सकता है।
कामकाजी महिलाओं को मिलेगी राहत
कई महिला कर्मचारियों को बच्चे के जन्म के बाद नौकरी और परिवार के बीच तालमेल बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लंबे समय का मातृत्व अवकाश उन्हें बड़ी राहत दे सकता है।
महिलाओं का कहना है कि बच्चे के शुरुआती वर्षों में मां की मौजूदगी बेहद जरूरी होती है। सरकार का यह फैसला महिला कर्मचारियों के लिए सकारात्मक कदम है।
फैसले का व्यापक असर
तमिलनाडु सरकार के इस फैसले के बाद अब अन्य राज्यों में भी मातृत्व अवकाश की नीतियों को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। महिला अधिकारों और कार्यस्थल पर समान अवसर को लेकर यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल तमिलनाडु सरकार का यह निर्णय महिला कर्मचारियों के लिए बड़ी सौगात के रूप में सामने आया है। तीसरे बच्चे के जन्म पर भी 365 दिन का मातृत्व अवकाश मिलने से हजारों महिला कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
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