
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के नमक्कल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी-करप्शन ब्रांच पुलिस ने मंगलवार को डीड्स रजिस्ट्री ऑफिस के एक रजिस्ट्रार और उसके सहायक को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई से प्रशासनिक विभाग में हड़कंप मच गया है।
जानकारी के अनुसार, नमक्कल-मोहनूर रोड पर तालुक ऑफिस के पास स्थित रजिस्ट्रार-2 डीड्स ऑफिस में यह मामला सामने आया। यहां लॉरी मालिक और ड्राइवर सुंदरराजन (60) अपनी एक संपत्ति का सेटलमेंट डीड रजिस्टर कराने के लिए पहुंचे थे। उनका उद्देश्य अपने प्रॉपर्टी दस्तावेजों का पंजीकरण कराना था।
आरोप है कि कार्यालय में तैनात रजिस्ट्रार मनोहरन (47) और उनके सहायक सतीश (38) ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उनसे 50,000 रुपये की रिश्वत की मांग की। दोनों अधिकारियों ने कथित रूप से कहा कि भुगतान करने पर बिना किसी बाधा के दस्तावेजों का पंजीकरण कर दिया जाएगा।
शिकायतकर्ता सुंदरराजन ने बताया कि शुरुआत में वह इस मांग से हैरान हो गए, लेकिन बाद में बातचीत के दौरान वह 30,000 रुपये देने के लिए सहमत हो गए। हालांकि, उन्होंने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को इसकी जानकारी देने का निर्णय लिया।
इसके बाद एंटी-करप्शन ब्रांच पुलिस ने योजना बनाकर कार्रवाई की और मंगलवार को दोनों आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद दोनों अधिकारियों को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि सरकारी कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा सेवा प्रदान करने के बदले अनधिकृत रूप से धन की मांग की जा रही थी, जो कि स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार के दायरे में आता है। मामले में आगे की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस तरह की गतिविधियां पहले भी की गई हैं।
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
वहीं प्रशासनिक स्तर पर भी इस घटना को गंभीरता से लिया गया है। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि मामले की विस्तृत जांच के बाद आवश्यक विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
भ्रष्टाचार निरोधक विभाग की इस कार्रवाई को एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिससे सरकारी कार्यालयों में रिश्वतखोरी पर रोक लगाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।





