तमिलनाडू

स्टालिन की मीसा हिरासत पर सवाल मंत्री ने मांगा दस्तावेजी प्रमाण

Kavita2
12 Sept 2026 3:55 PM IST
स्टालिन की मीसा हिरासत पर सवाल मंत्री ने मांगा दस्तावेजी प्रमाण
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चेन्नई। तमिलनाडु में आपातकाल के दौरान एम. के. स्टालिन की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। राज्य के मंत्री आर. निर्मल कुमार ने शनिवार को द्रमुक प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन को चुनौती दी कि वे मीसा के तहत हिरासत में रखे जाने के प्रमाण के रूप में आधिकारिक आदेश की प्रति सार्वजनिक करें। मंत्री ने दावा किया कि स्टालिन की हिरासत को मीसा से जोड़ने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। द्रमुक अपने नेता के आपातकाल के दौरान जेल जाने और उत्पीड़न सहने की बात लगातार दोहराती रही है।

निर्मल कुमार ने द्रमुक की ओर से स्टालिन के राजनीतिक संघर्ष के संदर्भ में पेश किए जाने वाले इस प्रसंग पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि यदि गिरफ्तारी और हिरासत मीसा के तहत हुई थी, तो उससे संबंधित आदेश दिखाया जाना चाहिए। इस मांग के जरिए उन्होंने विवाद को दस्तावेजी प्रमाण के प्रश्न से जोड़ दिया है। हालांकि, मंत्री का बयान अपने आप ऐतिहासिक दावे को गलत साबित नहीं करता। हिरासत से संबंधित मूल रिकॉर्ड की पुष्टि इस विवाद में महत्वपूर्ण होगी।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब स्टालिन और उनके राजनीतिक संघर्ष को लेकर सत्ता पक्ष तथा द्रमुक के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की टिप्पणियों पर द्रमुक ने आपत्ति जताई थी। पार्टी ने आरोप लगाया कि उनके बयान से स्टालिन, दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि और अन्य नेताओं के योगदान को कम करके दिखाया गया। इसी पृष्ठभूमि में मीसा हिरासत से जुड़े दस्तावेजों की मांग ने बहस को नया मोड़ दिया है।

द्रमुक ने बुधवार को घोषणा की थी कि वह मुख्यमंत्री की विधानसभा में की गई टिप्पणियों के विरोध में 12 सितंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने अपने बयान में कहा था कि स्टालिन आपातकाल के दौरान लगभग एक वर्ष जेल में रहे और उन्हें उत्पीड़न सहना पड़ा। द्रमुक ने उनकी गिरफ्तारी मीसा के तहत होने की बात भी दोहराई। इस तरह मंत्री के दावे और पार्टी के रुख के बीच स्पष्ट मतभेद सामने आया है।

स्टालिन ने भी हाल में अपने जेल के अनुभवों का उल्लेख किया था। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने हिरासत के दौरान मारपीट किए जाने और जबड़े की हड्डी टूटने की बात कही। यह उनकी ओर से बताया गया व्यक्तिगत अनुभव है। मंत्री निर्मल कुमार ने हिरासत के कानूनी आधार पर सवाल उठाते हुए कहा कि मीसा के तहत रखे जाने का आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाया जाए। दोनों पक्षों के बयान अलग प्रश्नों पर केंद्रित हैं—एक जेल में हुए कथित उत्पीड़न पर और दूसरा हिरासत के आदेश पर।

मीसा का पूरा नाम मेंटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट था। आपातकाल की चर्चा में इस कानून का उल्लेख राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत के संदर्भ में होता है। स्टालिन की गिरफ्तारी का प्रसंग भी उनकी राजनीतिक जीवनयात्रा से जुड़ी प्रकाशित सामग्री में लंबे समय से मौजूद है। इसलिए वर्तमान चुनौती को केवल नया आरोप मानकर देखने के साथ उन पुराने विवरणों और अभिलेखों पर भी ध्यान देना आवश्यक है, जिनमें इस घटना का उल्लेख किया गया है।

द्रमुक के लिए यह प्रसंग अपने नेता की राजनीतिक पहचान और संघर्ष से जुड़ा है। पार्टी स्टालिन के जेल जाने को उनके शुरुआती सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण घटना के रूप में प्रस्तुत करती रही है। ऐसे में मंत्री की चुनौती पार्टी के उस ऐतिहासिक विवरण पर सीधा प्रश्न है। राजनीतिक दृष्टि से इस बहस का प्रभाव संगठन के कार्यकर्ताओं पर भी पड़ सकता है, क्योंकि द्रमुक नेतृत्व इसे अपने वरिष्ठ नेताओं के सम्मान और योगदान से जोड़ रहा है।

दूसरी ओर, निर्मल कुमार की मांग मूल दस्तावेज सामने लाने पर केंद्रित है। किसी हिरासत आदेश की प्रति उपलब्ध होने पर आदेश जारी करने वाली अथॉरिटी, तारीख और कानूनी आधार जैसे तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं। हालांकि, किसी दस्तावेज के सार्वजनिक रूप से सामने नहीं होने और उसके अस्तित्व में नहीं होने के बीच अंतर है। उपलब्ध जानकारी में मंत्री के दावे के समर्थन में संबंधित रिकॉर्ड की व्यापक खोज या किसी स्वतंत्र अभिलेखीय निष्कर्ष का विवरण नहीं दिया गया है।

विधानसभा की टिप्पणियों से शुरू हुई बहस अब राजनीतिक इतिहास की प्रमाणिकता तक पहुंच गई है। कानून मंत्री द्वारा स्टालिन की मीसा हिरासत के आधिकारिक रिकॉर्ड पर सवाल उठाए जाने का उल्लेख है। द्रमुक ने मुख्यमंत्री के आरोपों और टिप्पणियों का विरोध किया है। फिलहाल दोनों पक्ष अपनी स्थिति पर कायम दिखाई देते हैं।

अब आगे का ध्यान इस बात पर रहेगा कि मंत्री की नई चुनौती पर स्टालिन या द्रमुक क्या जवाब देते हैं और क्या कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक किया जाता है। संबंधित अभिलेख सामने आने से हिरासत के कानूनी आधार की स्पष्टता बढ़ सकती है। फिलहाल निर्मल कुमार का बयान एक राजनीतिक दावा है, जबकि द्रमुक मीसा के तहत गिरफ्तारी और जेल में उत्पीड़न का अपना पुराना रुख दोहरा रही है।

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