तमिलनाडू

मंदिरों की पवित्रता के लिए बड़ा कदम मोबाइल बैन पर उठे सवाल

Ratna Netam
3 Sept 2026 2:50 PM IST
मंदिरों की पवित्रता के लिए बड़ा कदम मोबाइल बैन पर उठे सवाल
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तमिलनाडु : मुख्यमंत्री और अभिनेता से नेता बने थलपति विजय की सरकार ने राज्य के प्रमुख हिंदू मंदिरों में एक नया नियम लागू किया है, जिसकी देशभर में चर्चा हो रही है। सरकार ने मंदिर परिसरों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का फैसला किया है। इस नियम के तहत श्रद्धालु मंदिर के अंदर मोबाइल से फोटो खींचने, वीडियो बनाने, सेल्फी लेने और सोशल मीडिया के लिए रील्स बनाने पर रोक रहेगी।
सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य मंदिरों की धार्मिक गरिमा और पवित्र वातावरण को बनाए रखना है। कई मंदिरों में देखा गया था कि कुछ लोग दर्शन के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग और रील्स बनाने में व्यस्त रहते हैं, जिससे अन्य श्रद्धालुओं को परेशानी होती है और पूजा के माहौल पर भी असर पड़ता है। इसी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
नए नियम के अनुसार, श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश से पहले अपना मोबाइल फोन जमा करना होगा। इसके लिए मंदिरों के बाहर विशेष काउंटर और लॉकर व्यवस्था की जा रही है। फोन जमा करने वाले श्रद्धालुओं को रसीद या टोकन दिया जाएगा, जिसे दिखाकर वे दर्शन के बाद अपना मोबाइल वापस ले सकेंगे।
52 प्रमुख मंदिरों में लागू हुआ नियम
तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) के निर्देश के बाद राज्य के कई प्रमुख मंदिरों में यह व्यवस्था लागू की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआत में करीब 52 बड़े मंदिरों में स्मार्टफोन प्रतिबंध की व्यवस्था लागू की गई है। मंदिर प्रशासन की ओर से प्रवेश द्वारों पर सूचना बोर्ड लगाए जा रहे हैं और श्रद्धालुओं को नियमों की जानकारी दी जा रही है।
इस फैसले को लेकर श्रद्धालुओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोग इसे मंदिरों की पवित्रता बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि मोबाइल पूरी तरह बंद करने के बजाय नियंत्रित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।
क्यों लिया गया यह फैसला
पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक स्थलों पर सोशल मीडिया कंटेंट बनाने का चलन तेजी से बढ़ा है। कई लोग मंदिरों में पूजा से ज्यादा फोटो और वीडियो बनाने पर ध्यान देने लगे हैं। कई बार ऐसे वीडियो वायरल भी हुए जिनमें मंदिरों की मर्यादा और परंपराओं को लेकर सवाल उठे।
सरकार का मानना है कि मंदिर केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि आस्था के केंद्र हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को शांत वातावरण में पूजा और दर्शन का अनुभव मिलना चाहिए। इसी उद्देश्य से मोबाइल प्रतिबंध का फैसला लिया गया है।
लागू करवाना सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि नियम बनाना आसान है, लेकिन उसे पूरी तरह लागू करना सरकार और मंदिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। तमिलनाडु में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु बड़े मंदिरों में पहुंचते हैं। ऐसे में हर व्यक्ति की जांच करना और मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था को सुचारू रखना आसान काम नहीं होगा।
कई मंदिरों में भीड़ इतनी ज्यादा होती है कि प्रवेश और निकासी के दौरान लंबी लाइनें लग जाती हैं। ऐसे में मोबाइल जमा करने और वापस लेने की प्रक्रिया में अतिरिक्त समय लग सकता है। प्रशासन को इसके लिए पर्याप्त कर्मचारियों और बेहतर प्रबंधन की जरूरत होगी।
सुरक्षा को लेकर भी उठे सवाल
मोबाइल जमा कराने की व्यवस्था के साथ सुरक्षा भी एक अहम मुद्दा है। श्रद्धालु अपने महंगे मोबाइल फोन मंदिर प्रशासन के भरोसे जमा करेंगे, ऐसे में उनकी सुरक्षा और जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि मोबाइल फोन सुरक्षित रहें और किसी भी तरह की चोरी या नुकसान की स्थिति में श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। इसके लिए आधुनिक लॉकर सिस्टम और डिजिटल रिकॉर्ड जैसी व्यवस्थाओं की जरूरत पड़ सकती है।
समर्थकों ने फैसले का किया स्वागत
कई धार्मिक संगठनों और श्रद्धालुओं ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि मंदिरों में अनुशासन और शांति बनाए रखने के लिए ऐसे नियम जरूरी हैं। इससे लोग पूजा और आध्यात्मिक अनुभव पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे।
वहीं कुछ लोगों का कहना है कि आज के डिजिटल दौर में मोबाइल केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि जरूरत भी बन चुका है। आपात स्थिति में संपर्क के लिए मोबाइल जरूरी होता है, इसलिए पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की बजाय कुछ जगहों पर नियंत्रित उपयोग की अनुमति दी जानी चाहिए।
विजय सरकार के लिए बड़ा प्रशासनिक फैसला
थलपति विजय के नेतृत्व वाली सरकार का यह फैसला धार्मिक स्थलों के प्रबंधन से जुड़ा बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे साफ है कि सरकार मंदिरों में व्यवस्था सुधारने और श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
हालांकि आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह नियम जमीन पर कितना प्रभावी साबित होता है। अगर मंदिर प्रशासन इसे सफलतापूर्वक लागू कर पाता है तो देश के अन्य धार्मिक स्थलों में भी ऐसी व्यवस्था पर चर्चा हो सकती है।
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