
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु सरकार ने कृषि और किसान कल्याण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘दाल आत्मनिर्भरता आंदोलन’ की शुरुआत की है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में उड़द, मूंग, मसूर और करमणी जैसी दालों का उत्पादन बढ़ाना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। कृषि और किसान कल्याण मंत्री आर. विनोद ने बुधवार को इस योजना की जानकारी देते हुए कहा कि प्राइमरी एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव सोसाइटी, उत्पादक संगठन और व्यक्तिगत किसान दाल प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं।
मंत्री ने बताया कि यह योजना 2025-26 से लागू की जा रही है और इसमें केंद्र और राज्य सरकारें कृषि विभाग के माध्यम से सहयोग करेंगी। योजना के तहत दाल प्रोसेसिंग प्लांट लगाने के लिए किसानों और उत्पादक संगठनों को प्लांट लागत का 33 प्रतिशत हिस्सा सब्सिडी के रूप में प्रदान किया जाएगा, जो अधिकतम 25 लाख रुपये तक सीमित है। इससे किसानों को दाल उत्पादन के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग और मार्केटिंग में भी मदद मिलेगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि इस योजना से राज्य में दालों की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, मूल्य श्रृंखला मजबूत होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी। योजना का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं है, बल्कि किसानों को प्रोसेसिंग और विपणन में आत्मनिर्भर बनाना भी है। इस पहल से स्थानीय किसानों, सहकारी समितियों और उत्पादक संगठनों को सीधे लाभ मिलेगा और दालों का निर्यात भी बढ़ सकेगा।
तमिलनाडु के कुल 37 जिलों के इच्छुक और प्रेरित किसान, उत्पादक संगठन, क्लस्टर-स्तरीय संघ और प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां इस योजना के अंतर्गत लाभ उठा सकती हैं। इसमें चेंगलपट्टू, तिरुवल्लूर, कुड्डालोर, करूर, विल्लुपुरम, कल्लाकुरिची, वेल्लोर, तिरुपथुर, रानीपेट, तिरुवन्नामलाई, सेलम, नमक्कल, धर्मपुरी, कृष्णगिरी, कोयंबटूर, तिरुप्पुर, इरोड, त्रिची, अरियालुर, पुदुक्कोट्टई, तंजावुर, नागपट्टिनम, मयिलादुथुराई, तिरुवरूर, मदुरै, थेनी, डिंडीगुल, रामनाथपुरम, शिवगंगा, विरुधुनगर, तिरुनेलवेली, तेनकासी और थूथुकुडी जिले शामिल हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से राज्य में दालों की खेती और प्रोसेसिंग में सुधार होगा, जिससे किसानों की आमदनी में स्थिरता आएगी। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित होने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और दालों की कीमतों में स्थिरता आएगी।
इस योजना के तहत प्लांट स्थापित करने वाले किसानों को कृषि विभाग द्वारा तकनीकी और वित्तीय मार्गदर्शन भी प्रदान किया जाएगा। योजना के लाभार्थियों को उत्पादन, प्रोसेसिंग और विपणन से जुड़ी जानकारी भी दी जाएगी ताकि वे पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन सकें और बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार उत्पाद तैयार कर सकें।
मंत्री आर. विनोद ने किसानों और सहकारी समितियों से इस योजना में भाग लेने और अपने जिलों में दाल उत्पादन और प्रोसेसिंग को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस पहल के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा लाना चाहती है और किसानों को आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहती है





