
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु में डीएमके के प्रमुख और साफ-साफ बोलने वाले नेताओं में शामिल पूर्व वित्त और आईटी मंत्री पी टी आर पलानीवेल थियागा राजन (PTR) ने सक्रिय राजनीति से अस्थायी दूरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने सोमवार को घोषणा की कि वे एक किताब लिखने के लिए राजनीति से “छोटा ब्रेक” ले रहे हैं और इस दौरान विभिन्न विषयों पर देश और विदेश में आयोजित होने वाली चर्चाओं में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रण स्वीकार करेंगे।
अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा किए गए एक लंबे पोस्ट में थियागा राजन ने कहा कि वह सार्वजनिक सेवा के प्रति अपने जुनून को जारी रखते हुए कुछ समय के लिए खुद को “रिचार्ज और रिफ्रेश” करेंगे, ताकि भविष्य में और बेहतर तरीके से समाज और राजनीति में योगदान दे सकें। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनका उद्देश्य एक बार फिर नए दृष्टिकोण और ऊर्जा के साथ सक्रिय भूमिका में लौटना है।
पी टी आर थियागा राजन, जो पहले एक शीर्ष बैंकर रहे हैं, 2016 में राजनीति में आए और मदुरै (सेंट्रल) सीट से विधानसभा चुनाव जीतकर डीएमके के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। वे अपने बेबाक बयानों और प्रशासनिक अनुभव के लिए जाने जाते रहे हैं।
उन्होंने 2021 से 2023 तक तमिलनाडु सरकार में वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया, जहां उन्हें राज्य की आर्थिक नीतियों को संभालने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में स्थानांतरित कर दिया गया था।
हाल के विधानसभा चुनाव में उन्हें टीवीके के वी एम एस मुस्तफा से हार का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। अब उनके द्वारा लिया गया यह “ब्रेक” राजनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
थियागा राजन का संबंध मदुरै के एक प्रतिष्ठित परिवार से है, जो लंबे समय से द्रविड़ आंदोलन और डीएमके से जुड़ा रहा है। उनके परिवार की राजनीतिक विरासत भी तमिलनाडु की राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उनके कार्यकाल के दौरान एक कथित ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद भी खड़ा हुआ था, जिसमें सरकार संचालन को लेकर कुछ टिप्पणियां सामने आई थीं। इसके बाद उन्हें वित्त मंत्रालय से हटाकर आईटी विभाग में भेजा गया था।
कुल मिलाकर, पी टी आर पलानीवेल थियागा राजन का सक्रिय राजनीति से अस्थायी ब्रेक लेना तमिलनाडु की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में डीएमके की रणनीति और आंतरिक समीकरणों पर भी असर डाल सकता है।





