तमिलनाडू

तमिलनाडु में शराब बिक्री व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी

Kavita2
30 July 2026 9:14 AM IST
तमिलनाडु में शराब बिक्री व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी
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चेन्नई। तमिलनाडु सरकार राज्य में शराब की खुदरा बिक्री व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार शराब की खुदरा बिक्री से धीरे-धीरे खुद को अलग करने की योजना पर विचार कर रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो सरकारी कंपनी TASMAC (Tamil Nadu State Marketing Corporation) केवल शराब बिक्री के लिए लाइसेंस जारी करने वाली संस्था के रूप में कार्य करेगी, जबकि खुदरा दुकानों का संचालन निजी कंपनियों के हाथों में सौंपा जाएगा।

वर्ष 2003 में शुरू की गई TASMAC को तमिलनाडु में शराब की थोक और खुदरा बिक्री का विशेष अधिकार दिया गया था। वर्तमान में राज्यभर में TASMAC की लगभग 4,048 खुदरा दुकानें संचालित हो रही हैं। इन दुकानों के माध्यम से हर साल सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है। वित्त वर्ष 2024-25 में तमिलनाडु सरकार को केवल आबकारी शुल्क (Excise Duty) और वैट (VAT) से लगभग 48,344 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जो राज्य की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है।

हालांकि, सरकार द्वारा सीधे शराब की बिक्री किए जाने के कारण लंबे समय से कई तरह की आलोचनाओं और शिकायतों का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक शिकायतें दुकानों पर अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत वसूले जाने, दुकानों में अव्यवस्था, कर्मचारियों के व्यवहार और पारदर्शिता की कमी को लेकर सामने आती रही हैं। इसके अलावा, शराबबंदी की मांग करने वाले सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों का विरोध भी सीधे सरकार के खिलाफ केंद्रित होता रहा है, क्योंकि शराब बिक्री का संचालन स्वयं सरकार करती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इन्हीं कारणों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार शराब की खुदरा बिक्री से अपनी प्रत्यक्ष भूमिका समाप्त करने की दिशा में विचार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सरकार केवल लाइसेंस जारी करने और नियामक की भूमिका निभाएगी, जबकि निजी कंपनियां निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत शराब की दुकानों का संचालन करेंगी। माना जा रहा है कि इससे सरकार पर सीधे लगने वाले आरोपों और विरोध-प्रदर्शनों का दबाव कम हो सकता है।

जानकारी के मुताबिक, यदि योजना को मंजूरी मिलती है तो इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में शहरी स्थानीय निकायों के अंतर्गत आने वाली लगभग 2,500 TASMAC दुकानों का संचालन निजी कंपनियों को सौंपा जा सकता है। इन कंपनियों का चयन लाइसेंस प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। सरकार इन दुकानों के संचालन की निगरानी करेगी और आवश्यक नियमों का पालन सुनिश्चित करेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निजी क्षेत्र को शराब की खुदरा बिक्री में प्रवेश मिलता है तो इससे ग्राहकों को बेहतर सेवाएं, अधिक पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का लाभ मिल सकता है। आधुनिक प्रबंधन प्रणाली अपनाने से दुकानों की कार्यप्रणाली में सुधार आने की संभावना भी जताई जा रही है। हालांकि, इसके साथ यह चिंता भी व्यक्त की जा रही है कि निजी कंपनियां अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से बिक्री बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं, जिसके सामाजिक प्रभावों पर सरकार को विशेष ध्यान देना होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह प्रस्ताव केवल आर्थिक नहीं बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शराब बिक्री से जुड़े विवादों और विरोध-प्रदर्शनों का सीधा असर सरकार की छवि पर पड़ता रहा है। ऐसे में यदि सरकार केवल लाइसेंस जारी करने वाली संस्था बन जाती है तो शराब बिक्री के संचालन से जुड़ी दैनिक शिकायतों की जिम्मेदारी निजी संचालकों पर होगी, जबकि सरकार नियामक की भूमिका में रहेगी।

फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस दिशा में गंभीर स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है और संबंधित विभाग संभावित मॉडल पर काम कर रहे हैं। यदि यह योजना लागू होती है तो तमिलनाडु की शराब बिक्री व्यवस्था में वर्ष 2003 के बाद सबसे बड़ा बदलाव माना जाएगा।

आने वाले समय में सरकार इस संबंध में क्या अंतिम निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यदि निजीकरण की यह योजना लागू होती है तो यह न केवल राज्य की राजस्व व्यवस्था बल्कि शराब बिक्री के पूरे प्रशासनिक ढांचे और नियामक प्रणाली में भी व्यापक परिवर्तन ला सकती है।

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