Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु में लगातार बिजली कटौती के कारण किसानों को हो रही परेशानी को लेकर डीएमडीके की महासचिव प्रेमलता विजयकांत ने राज्य सरकार से तुरंत प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति में बार-बार आने वाली बाधा से कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रेमलता विजयकांत ने अपने बयान में विशेष रूप से कुड्डालोर जिले के वृद्धाचलम और आसपास के क्षेत्रों की स्थिति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में लगातार बिजली कटौती के कारण किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। पानी की कमी की वजह से खेतों में खड़ी फसलें सूखने लगी हैं, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से गंभीर नुकसान हो रहा है।
उन्होंने कहा कि पहले से ही कृषि क्षेत्र कई चुनौतियों का सामना कर रहा है और ऐसे में बिजली कटौती की समस्या किसानों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा घोषित ऋण माफी योजनाओं से किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिल सकी है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और कमजोर हो गई है।
डीएमके नेता ने आरोप लगाया कि मौजूदा हालात में किसान गंभीर संकट से गुजर रहे हैं और उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी पूरी तरह मौसम और सिंचाई व्यवस्था पर निर्भर होती है, ऐसे में बिजली की अनियमित आपूर्ति किसानों के लिए बड़ी समस्या बन चुकी है।
उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए बिजली आपूर्ति व्यवस्था को तुरंत दुरुस्त किया जाए और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि सिंचाई कार्य प्रभावित न हो। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन कर प्रभावित किसानों को उचित सहायता प्रदान करनी चाहिए।
प्रेमलता विजयकांत ने कहा कि अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में किसानों की स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि बिजली कटौती की समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए और कृषि क्षेत्र को स्थिरता प्रदान की जाए।
इस बयान के बाद राज्य में किसानों की समस्याओं को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कई किसान संगठनों ने भी बिजली आपूर्ति सुधारने की मांग को समर्थन दिया है। उनका कहना है कि खेती की लागत बढ़ रही है और ऐसे में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा में बाधा किसानों की मुश्किलें और बढ़ा देती है।
फिलहाल सरकार की ओर से इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को लेकर दबाव बढ़ता दिख रहा है।





