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चेन्नई। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में पल्लीकरनई दलदली भूमि पर रिटेनिंग वॉल और वॉकवे के निर्माण को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पट्टाली मक्कल काची (PMK) के अध्यक्ष डॉ. अंबुमणि रामदास ने गुरुवार को आरोप लगाया कि इन निर्माण कार्यों के कारण बारिश के पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया है। इससे पल्लीकरनई और जल्लादियनपेट के कई इलाकों में जलभराव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने राज्य सरकार से निर्माण कार्य तत्काल रोकने, पहले से बनाई गई संरचनाओं को गिराने और पूरे प्रोजेक्ट की जांच कराने की मांग की है।
तीन किलोमीटर लंबी दीवार बनी विवाद की वजह
अंबुमणि रामदास ने अपने बयान में बताया कि पल्लीकरनई दलदली क्षेत्र में 'नीथल रेस्टोरेशन एंड कंजर्वेशन वर्क्स' परियोजना के तहत निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इस परियोजना में लगभग तीन किलोमीटर लंबी और छह फुट ऊंची रिटेनिंग वॉल बनाई जा रही है। इसके अलावा दलदली भूमि के भीतर करीब दो किलोमीटर लंबा वॉकवे भी विकसित किया जा रहा है।रामदास का आरोप है कि ये दोनों संरचनाएं प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था में बाधा बन रही हैं। उन्होंने कहा कि दलदली भूमि का मुख्य काम आसपास के क्षेत्रों से आने वाले बारिश के पानी को अपने भीतर समाहित करना है। लेकिन दीवार और वॉकवे के निर्माण से यह प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
पहले ही दी थी बाढ़ आने की चेतावनी
पीएमके अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी ने पहले भी सरकार और वन विभाग को इस परियोजना से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में आगाह किया था। उन्होंने दावा किया कि चार सितंबर को जारी बयान में निर्माण कार्य रोकने और बनाई गई संरचनाओं को हटाने की मांग की गई थी।इसके बावजूद वन विभाग ने निर्माण कार्य जारी रखा। रामदास के मुताबिक, पार्टी की चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लिया गया और अब आसपास के इलाकों में जलभराव के रूप में इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं।उन्होंने कहा कि प्राकृतिक जल निकासी की अनदेखी करके किए जाने वाले निर्माण कार्य भविष्य में भी स्थानीय निवासियों के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं।
17 अक्टूबर की बारिश के बाद बढ़ी परेशानी
रामदास ने दावा किया कि 17 अक्टूबर को हुई बारिश के बाद पल्लीकरनई और जल्लादियनपेट में बड़ी मात्रा में पानी जमा हो गया। चेन्नई के कुछ अन्य इलाकों में भारी बारिश के बावजूद पानी कुछ घंटों में निकल गया, लेकिन इन दोनों क्षेत्रों में जलभराव बना रहा।उन्होंने कहा कि वन विभाग के कर्मचारी मशीनों की सहायता से जमा पानी को दलदली क्षेत्र की ओर निकालने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद पानी पूरी तरह नहीं निकल पाया है।रामदास के अनुसार, यह स्थिति दर्शाती है कि निर्माण कार्यों ने इलाके की प्राकृतिक जल निकासी को प्रभावित किया है। हालांकि, बाढ़ और निर्माण कार्यों के बीच सीधे संबंध की पुष्टि के लिए स्वतंत्र तकनीकी जांच आवश्यक होगी।
निर्माण हटाने और जांच कराने की मांग
पीएमके अध्यक्ष ने राज्य सरकार से मांग की है कि परियोजना के अंतर्गत चल रहे सभी निर्माण कार्य तत्काल बंद किए जाएं। साथ ही पहले से निर्मित रिटेनिंग वॉल और वॉकवे को हटाकर दलदली भूमि को उसकी प्राकृतिक स्थिति में बहाल किया जाए।उन्होंने परियोजना के उद्देश्य, इसे मंजूरी देने की प्रक्रिया और इसके पीछे जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की भी मांग की।रामदास ने कहा कि यदि किसी परियोजना से पर्यावरण और आम नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित होती है, तो उसकी उपयोगिता पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
दलदली भूमि के संरक्षण पर उठे सवाल
पल्लीकरनई दलदली भूमि चेन्नई की महत्वपूर्ण प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्थाओं में से एक है। यह क्षेत्र बारिश के अतिरिक्त पानी को समाहित करने के साथ जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।पर्यावरण से जुड़े जानकार लंबे समय से इस क्षेत्र में अतिक्रमण, निर्माण गतिविधियों और जल निकासी के रास्तों में बदलाव को लेकर चिंता जताते रहे हैं। दलदली भूमि की प्राकृतिक संरचना में परिवर्तन होने से आसपास की आवासीय बस्तियों में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है।इस बीच, पीएमके की ओर से दीवार और वॉकवे हटाने की मांग ने परियोजना को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब सवाल यह है कि सरकार निर्माण कार्यों से होने वाले संभावित पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन कराएगी या मौजूदा परियोजना को जारी रखेगी।रामदास ने दोहराया कि पल्लीकरनई दलदली भूमि का संरक्षण प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी विकास परियोजना से उसकी प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
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