तमिलनाडू

Palaru किसान एसोसिएशन ने फसल लोन माफी की पूरी योजना लागू करने की मांग की

Kavita2
4 Jun 2026 9:10 AM IST
Palaru किसान एसोसिएशन ने फसल लोन माफी की पूरी योजना लागू करने की मांग की
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Tamil Nadu तमिलनाडु: पलारू प्रोटेक्शन फार्मर्स एसोसिएशन ने किसानों के फसल लोन पूरी तरह माफ करने की मांग को लेकर तिरुपत्तूर जिला कलेक्टर कार्यालय में अर्जी दी है। एसोसिएशन के अधिकारियों का कहना है कि किसान कृषि के लिए कोऑपरेटिव सोसाइटी के माध्यम से लोन लेते हैं, लेकिन लगातार बढ़ती लागत और इनपुट कीमतों के कारण वे अपने लोन का भुगतान समय पर नहीं कर पा रहे हैं।

अर्जी में बताया गया कि खेती में इस्तेमाल होने वाले बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक सामग्री की कीमतों में हर साल बढ़ोतरी होती रहती है। इस वजह से छोटे और सीमांत किसान अपेक्षित मुनाफ़ा नहीं कमा पा रहे और कई किसान इस दबाव में आत्महत्या जैसी घटनाओं तक के शिकार हो रहे हैं।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि चुनावी वादों में छोटे और सीमांत किसानों के लिए सभी कोऑपरेटिव सोसाइटी लोन पूरी तरह माफ करने और बड़े किसानों के लोन का 50 प्रतिशत माफ करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन हाल ही में इस योजना में संशोधन कर दिया गया है। अब सरकार केवल छोटे और सीमांत किसानों के 50 हज़ार रुपये तक के लोन को माफ करेगी और हर लोन अलग से माफ किया जाएगा।

पलारू प्रोटेक्शन फार्मर्स एसोसिएशन के अधिकारियों ने कहा कि इस संशोधित योजना से किसानों को पर्याप्त राहत नहीं मिलेगी। उनका मानना है कि केवल सीमित राशि के लोन माफ करने और हर लोन अलग से तय करने का निर्णय किसानों की वास्तविक समस्याओं को हल नहीं करेगा। किसानों को फसल की लागत और बढ़ती कीमतों के बीच आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है, जिसे पूरा समाधान तभी मिलेगा जब लोन पूरी तरह माफ किया जाएगा।

एसोसिएशन ने जिला प्रशासन से अपील की है कि वे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लें और योजना को चुनावी वादों के अनुरूप लागू करें। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर लोन माफी की प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया, तो किसान संगठन आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन करने के लिए मजबूर हो सकते हैं।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक सुरक्षा के लिए फसल लोन माफी एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि योजना में केवल आंशिक राहत दी जाती है, तो यह किसानों के संकट को बढ़ा सकती है और उन्हें कर्ज़ के दबाव में और अधिक आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

सरकारी अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि लोन माफी योजना पर पुनर्विचार किया जा रहा है और किसान संगठनों के सुझावों पर गौर किया जाएगा। इसके बावजूद फिलहाल किसानों के बीच चिंता और असंतोष बना हुआ है।

इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक सुरक्षा और कर्ज़ मुक्त होने की प्रक्रिया समय पर और प्रभावी रूप से लागू करना आवश्यक है। किसान संगठनों की मांग है कि योजना को जल्द से जल्द पूरी तरह लागू किया जाए ताकि कृषि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे और किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित रहें।

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