
Tamil Nadu तमिलनाडु: त्रिची के महात्मा गांधी मेमोरियल सरकारी जनरल अस्पताल में सर्जरी करवाने वाले एक नर्सिंग कॉलेज स्टूडेंट की मौत के मामले में एक एक्सपर्ट पैनल ने कहा है कि 'डेक्सामेथासोन' दवा जिम्मेदार हो सकती है। पैनल ने इसकी मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी की जांच करने की भी सिफ़ारिश की है।
अप्रैल महीने में तमिलनाडु मेडिकल सर्विसेज़ कॉर्पोरेशन (TNMSC) ने त्रिची सरकारी अस्पताल को अकेले 4,000 शीशियां डेक्सामेथासोन की उपलब्ध करवाई थीं। इनमें से 3,500 से अधिक शीशियों का इस्तेमाल मरीजों पर किया जा चुका है, जबकि लगभग 300 शीशियां स्टॉक में बची हैं।
डेक्सामेथासोन का इस्तेमाल एलर्जी और सूजन के इलाज के लिए सर्जरी के दौरान और बाद में किया जाता है। हालांकि, त्रिची अस्पताल में सर्जरी के दौरान दवा के एक विशेष बैच का इंजेक्शन लगाने के बाद तीन मरीजों में गंभीर दिल की समस्याएं सामने आई हैं।
इन मरीजों में तेज़ हार्ट रेट (टैकीएरिथमिया), हार्ट मांसपेशियों का कमजोर होना (कार्डियोमायोपैथी), गंभीर लेफ्ट वेंट्रिकुलर डिसफंक्शन और कार्डियोजेनिक शॉक जैसी दिक्कतें देखने को मिली हैं। कार्डियोजेनिक शॉक हार्ट फेलियर की वजह से होने वाली एक खतरनाक स्थिति है, जिसमें शरीर के अंगों तक पर्याप्त खून नहीं पहुँच पाता।
एक्सपर्ट पैनल ने कहा कि इस मामले में दवा की गुणवत्ता और बैच की जांच जरूरी है, ताकि यह तय किया जा सके कि दवा के कारण ही गंभीर साइड इफेक्ट और मौत हुई या अन्य कारण भी शामिल हैं। पैनल ने अस्पताल प्रशासन और TNMSC से इस संबंध में पूरी रिपोर्ट तैयार करने और सभी बची हुई शीशियों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है।
इस मामले ने अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग में चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों ने कहा कि सर्जरी के दौरान और बाद में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की क्वालिटी और बैच पर कड़ी निगरानी रखनी चाहिए, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि प्रभावित मरीजों को तुरंत इमरजेंसी और कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कर आवश्यक इलाज दिया गया। मृत छात्रा के परिवार को भी प्रशासन की तरफ से सहायता दी जा रही है।
त्रिची मेडिकल सर्विसेज़ विभाग ने कहा कि सभी दवाओं की गुणवत्ता पर नियमित जांच होती है, लेकिन इस विशेष मामले में बैच की समस्या की संभावना को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। मरीजों और उनके परिवारों को आश्वस्त किया गया है कि सुरक्षा और इलाज को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी।
इस घटना ने तमिलनाडु में अस्पतालों और स्वास्थ्य प्रबंधन में दवा सुरक्षा की गंभीरता को उजागर किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में सभी सरकारी अस्पतालों में दवा के बैच और मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी की सख्त निगरानी की जाएगी।





