
चेन्नई। तमिलनाडु में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहीं हजारों नर्सों और राज्य सरकार के बीच टकराव बढ़ गया है। आंदोलनकारी नर्सों ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों की ओर से दावा किया गया कि सरकार ने उनके प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए सचिवालय बुलाया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद पांच नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया। नर्सों के कानूनी प्रतिनिधि ने इसे सरकार की ओर से “धोखा” बताया है।
चेन्नई में तमिलनाडु इंटरमीडिएट हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन के बैनर तले बड़ी संख्या में नर्सें आंदोलन कर रही हैं। उनका प्रदर्शन राजारत्नम स्टेडियम के पास आयोजित किया गया था। नर्सों की प्रमुख मांगों में मासिक वेतन 45 हजार रुपये किए जाने, समान काम के लिए समान वेतन, स्थायी नियुक्ति, नौकरी की सुरक्षा और लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान शामिल है।
प्रदर्शनकारी नर्सों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगें सरकार के सामने रख रही हैं, लेकिन कोई ठोस समाधान नहीं निकला। इसी नाराजगी के चलते राज्यभर से नर्सें चेन्नई पहुंचीं और भूख हड़ताल तथा विरोध प्रदर्शन शुरू किया। आंदोलन के दौरान पुलिस और प्रशासन ने निर्धारित समय के बाद प्रदर्शन समाप्त करने को कहा, लेकिन कई नर्सों ने अपनी मांगें पूरी होने तक वहां से हटने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब प्रदर्शनकारियों की ओर से दावा किया गया कि सरकार ने समझौता वार्ता के लिए उनके पांच प्रतिनिधियों को सचिवालय बुलाया था। नर्सों की ओर से कानूनी सहायता उपलब्ध करा रहे अधिवक्ता वरथराजन ने आरोप लगाया कि करीब चार हजार प्रदर्शनकारी नर्सों ने आपसी सहमति से पांच नेताओं को बातचीत के लिए भेजा था, लेकिन सचिवालय पहुंचने के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
प्रदर्शनकारियों ने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अगर बातचीत के नाम पर प्रतिनिधियों को बुलाकर हिरासत में लिया गया है तो इससे सरकार और कर्मचारियों के बीच भरोसा कमजोर होगा। हालांकि यह आरोप प्रदर्शनकारी पक्ष की ओर से लगाया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों में सरकार की ओर से इस आरोप पर विस्तृत आधिकारिक जवाब तत्काल सामने नहीं आया है।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ नर्सों की तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आई हैं। लंबे समय तक भूख हड़ताल और प्रदर्शन के कारण कुछ प्रदर्शनकारी बेहोश हो गईं। इसके बाद मौके पर तनाव की स्थिति बनी रही। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और प्रदर्शन स्थल खाली कराने की कोशिश की।
नर्सों के प्रतिनिधियों का कहना है कि उनका आंदोलन वेतन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। वे नियमित नियुक्ति और नौकरी की सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दा बता रही हैं। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि स्वास्थ्य व्यवस्था में लगातार काम करने के बावजूद कई कर्मचारियों को स्थायी सेवा और समान वेतन का लाभ नहीं मिल रहा है। इसलिए उन्होंने सरकार से लंबे समय के समाधान की मांग की है।
अधिवक्ता वरथराजन ने आरोप लगाया कि विजय सरकार पुलिस बल के जरिए आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं किया जाएगा और नर्सें अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखेंगी। यह बयान प्रदर्शनकारी पक्ष का आरोप है और इसे सरकार के खिलाफ स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
राज्य में स्वास्थ्यकर्मियों का यह आंदोलन अब राजनीतिक मुद्दा भी बनता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार कुछ महीने पहले ही सत्ता में आई है और ऐसे में कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन सरकार के लिए प्रशासनिक चुनौती बन गया है। प्रदर्शनकारियों की संख्या और उनकी मांगों को देखते हुए सरकार पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ रहा है।
तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पहले से ही कई मुद्दों को लेकर गर्म है। विजय सरकार विपक्ष के निशाने पर है, जबकि टीवीके अपनी सरकार की नीतियों और निर्णयों को लेकर राजनीतिक मोर्चे पर सक्रिय है। ऐसे समय में नर्सों के आंदोलन और गिरफ्तारी के आरोपों ने सरकार के सामने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
प्रदर्शनकारी नर्सें चाहती हैं कि उनकी मांगों पर सरकार लिखित और स्पष्ट निर्णय ले। विशेष रूप से वेतन, स्थायी नियुक्ति और लंबित प्रोत्साहन राशि को लेकर जल्द समाधान की मांग की जा रही है। उनका कहना है कि केवल बातचीत का आश्वासन पर्याप्त नहीं है और सरकार को समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के कदम के तौर पर देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन के लिए तय समय समाप्त होने के बाद नर्सें वहां से हटने को तैयार नहीं थीं, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप किया। दूसरी तरफ आंदोलनकारी इसे अपनी आवाज दबाने की कार्रवाई बता रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम सवाल उन पांच नर्स नेताओं की कथित गिरफ्तारी को लेकर है जिन्हें प्रदर्शनकारी पक्ष बातचीत के लिए भेजे जाने की बात कह रहा है। यदि सरकार और आंदोलनकारी पक्ष के बीच बातचीत आगे बढ़ती है तो विवाद का समाधान निकल सकता है, लेकिन फिलहाल दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बढ़ता दिखाई दे रहा है।
तमिलनाडु में नर्सों का यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने साफ संकेत दिया है कि मांगें पूरी होने तक वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। वहीं सरकार के सामने स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य बनाए रखने के साथ-साथ कर्मचारियों की नाराजगी दूर करने की चुनौती है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विजय सरकार नर्सों की मांगों और बातचीत के लिए बुलाकर गिरफ्तारी के आरोप पर क्या आधिकारिक रुख अपनाती है।





