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चेन्नई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जेन-Z और जेन-अल्फा के युवाओं से देश के विकास में अपनी भूमिका पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। मंगलवार को चेन्नई में एक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने युवा स्नातकों से कहा कि वे केवल यह न सोचें कि देश ने उनके लिए क्या किया है, बल्कि यह भी पूछें कि वे खुद देश के लिए क्या योगदान दे सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपने-अपने क्षेत्र में नेतृत्व संभालने और राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
वित्त मंत्री चेन्नई के **डॉ. एमजीआर एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के 36वें दीक्षांत समारोह** को संबोधित कर रही थीं। कार्यक्रम में मेडिकल, डेंटल, इंजीनियरिंग, एलाइड हेल्थ साइंसेज, कानून और मैनेजमेंट सहित अलग-अलग क्षेत्रों के 3,200 से ज्यादा विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। सीतारमण ने छात्रों से शिक्षा पूरी करने के बाद मिलने वाले अवसरों के साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी समझने को कहा।
जेन-Z और जेन-अल्फा को दिया खास संदेश
निर्मला सीतारमण ने अपने संबोधन में विशेष रूप से जेन-Z और जेन-अल्फा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि युवा खुद को चाहे जेन-Z कहें या जेन-अल्फा, उनकी बात और उनकी आकांक्षाओं को सुनने के लिए देश तैयार है।
लेकिन इसके साथ युवाओं को अपने आसपास हो रही घटनाओं को समझना होगा। उन्हें यह भी सोचना होगा कि समाज और देश में उनकी भूमिका क्या है और उनके जरिए देश के लिए क्या हासिल किया जा सकता है।
उनका संदेश युवाओं को केवल रोजगार या व्यक्तिगत सफलता तक सीमित रहने के बजाय नागरिक जिम्मेदारी और राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करने पर केंद्रित था।
लीडरशिप संभालिए और देश को पहले रखिए'
वित्त मंत्री ने स्नातक छात्रों से अपने-अपने क्षेत्र में नेतृत्व की जिम्मेदारी उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को आगे आकर नेतृत्व करना चाहिए और देश को सबसे पहले रखना चाहिए।
सीतारमण ने राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता को भी अपने संबोधन का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि देश मजबूत और सुरक्षित रहेगा तभी नागरिकों के पास रहने और आगे बढ़ने के लिए सुरक्षित जगह होगी। इसलिए देश के हित से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि डिग्री मिलने के बाद उनका सफर केवल नौकरी पाने या करियर बनाने तक सीमित नहीं है। भविष्य में अपने क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते समय उन्हें व्यापक सामाजिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखना चाहिए।
दुनिया में जारी संघर्षों का किया जिक्र
निर्मला सीतारमण ने दुनिया में चल रहे संघर्षों का उदाहरण देते हुए राष्ट्रीय स्थिरता की अहमियत समझाने की कोशिश की।
उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में जारी संघर्षों का जिक्र किया। वैश्विक तनावों का असर कच्चे तेल, गैस और उर्वरक जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसी परिस्थितियों में किसी देश के लिए आर्थिक और राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना महत्वपूर्ण हो जाता है।
वित्त मंत्री ने इसी संदर्भ में भारत की आर्थिक स्थिति की चर्चा की और कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश ने अपनी व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखी है।
7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का जिक्र
सीतारमण ने भारत की आर्थिक वृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत ने **7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि** दर्ज की है।
उन्होंने इस आर्थिक मजबूती का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजनीतिक स्थिरता और नीतियों को दिया। यह वित्त मंत्री और सरकार का आकलन है।
उनका कहना था कि दुनिया में कई तरह की चुनौतियों के बावजूद भारत आर्थिक मोर्चे पर आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में युवा पीढ़ी के सामने भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
तमिलनाडु के युवाओं के लिए गिनाए अवसर
वित्त मंत्री ने अपने संबोधन में तमिलनाडु की औद्योगिक और तकनीकी क्षमता का भी जिक्र किया। उन्होंने राज्य को युवाओं के लिए तेजी से बढ़ते अवसरों वाला प्रमुख केंद्र बताया।
सीतारमण ने **श्रीपेरंबदूर-ओरगडम कॉरिडोर** का उदाहरण देते हुए कहा कि यह क्षेत्र ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और स्मार्टफोन निर्यात के बड़े वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है।
उनका संदेश था कि तकनीक, मैन्युफैक्चरिंग और आधुनिक सेवाओं में तमिलनाडु के युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।
ऐसे में छात्रों को केवल पारंपरिक नौकरियों तक अपनी संभावनाओं को सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि तेजी से बदलते उद्योगों और तकनीकी क्षेत्रों में भी अवसर तलाशने चाहिए।
करीब 350 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर
निर्मला सीतारमण ने तमिलनाडु में बढ़ रहे ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC का भी जिक्र किया।
उनके मुताबिक राज्य में करीब **350 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर** मौजूद हैं, जो देश में मौजूद कुल GCC का लगभग 10 प्रतिशत हैं। उन्होंने बताया कि कोयंबटूर में ही करीब 80 GCC हैं, जिनमें लगभग 12 हजार पेशेवर काम कर रहे हैं।
इसके अलावा मदुरै और तिरुचिरापल्ली जैसे शहरों में भी इस तरह के केंद्र तेजी से बढ़ रहे हैं।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर आमतौर पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए टेक्नोलॉजी, डेटा, फाइनेंस, रिसर्च, एनालिटिक्स और दूसरी पेशेवर सेवाओं से जुड़े काम संभालते हैं। इनका विस्तार युवाओं के लिए उच्च कौशल वाली नौकरियों के नए अवसर पैदा कर सकता है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
वित्त मंत्री ने युवा महिलाओं के लिए उपलब्ध अवसरों और कार्यबल में उनकी भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर भी बात की।
उन्होंने केंद्रीय बजट में **हर जिले में कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल स्थापित करने से जुड़े प्रावधान** का उल्लेख किया। इसका उद्देश्य उन महिलाओं को सहायता देना है जो शिक्षा और नौकरी के लिए अपने घर से दूर जाती हैं।
सीतारमण ने खास तौर पर साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स यानी STEM क्षेत्रों में आगे बढ़ने वाली महिलाओं का उल्लेख किया।
कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास जैसी सुविधाओं को रोजगार में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सफलता के साथ विनम्रता भी जरूरी
सीतारमण ने छात्रों को केवल करियर और अर्थव्यवस्था से जुड़ी बातें ही नहीं बताईं, बल्कि व्यक्तिगत जीवन में अपनाए जाने वाले मूल्यों पर भी जोर दिया।
उन्होंने तमिल साहित्य के प्रसिद्ध ग्रंथ **तिरुक्कुरल** का उल्लेख करते हुए स्नातकों को विनम्र रहने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से अहंकार से बचने और चुनौतियों का सामना धैर्य के साथ करने को कहा।
उन्होंने युवाओं को खुद को हर परिस्थिति में पीड़ित मानने वाली मानसिकता से बचने और समस्याओं का सामना संतुलित तरीके से करने की सलाह भी दी।
उनका संदेश था कि बड़ी डिग्री या अच्छी नौकरी मिलने के बाद भी व्यक्ति को विनम्रता नहीं छोड़नी चाहिए।
युवाओं पर बढ़ रहा देश का फोकस
जेन-Z और जेन-अल्फा देश की शिक्षा, रोजगार, तकनीक और सामाजिक बदलाव में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के बीच बड़ी हुई यह पीढ़ी कई मायनों में पिछली पीढ़ियों से अलग परिस्थितियों में अपना भविष्य बना रही है।
हाल के समय में राजनीतिक दलों और सरकारों का ध्यान भी इन युवा पीढ़ियों पर बढ़ा है। शिक्षा, रोजगार, टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप और भविष्य के कौशल जैसे मुद्दे युवा संवाद के केंद्र में हैं।
ऐसे माहौल में वित्त मंत्री का संदेश युवाओं के अधिकारों और अपेक्षाओं के साथ उनकी नागरिक जिम्मेदारियों पर जोर देता दिखाई देता है।
देश से उम्मीद के साथ योगदान पर भी सोचें
निर्मला सीतारमण के पूरे संबोधन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि युवा देश से अवसर और बेहतर भविष्य की उम्मीद जरूर रखें, लेकिन इसके साथ उन्हें अपने योगदान पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने युवाओं की आकांक्षाओं को सुनने की बात कही, लेकिन साथ ही उनसे जिम्मेदारी निभाने और अपने क्षेत्र में नेतृत्व करने का आह्वान किया।
वित्त मंत्री ने वैश्विक संघर्ष, भारत की आर्थिक वृद्धि, तमिलनाडु में रोजगार के अवसर, महिलाओं की भागीदारी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे अलग-अलग विषयों को इसी संदेश से जोड़ा।
उनकी अपील थी कि नई पीढ़ी अपने व्यक्तिगत करियर और सफलता के साथ देश के भविष्य में अपनी भूमिका को भी समझे। **जेन-Z और जेन-अल्फा को नेतृत्व संभालने, देश को प्राथमिकता देने और यह सोचने की जरूरत है कि वे राष्ट्र के लिए क्या योगदान कर सकते हैं।
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