तमिलनाडू

NGO ने सीएम से अवैध होर्डिंग्स की शिकायत की, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं

Tulsi Rao
31 Oct 2026 11:29 AM IST
NGO ने सीएम से अवैध होर्डिंग्स की शिकायत की, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा होती हैं
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चेन्नई: चेन्नई में 33 फीट की तय सीमा के बजाय 100 फीट तक ऊंचे होर्डिंग लगाए गए हैं, जिससे सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

शुक्रवार को, भ्रष्टाचार विरोधी संगठन 'अराप्पोर इयक्कम' (Arappor Iyakkam) ने शहर में विज्ञापन नियमों के उल्लंघन वाले 23 ढांचों की पहचान की और इन्हें तुरंत हटाने की मांग की।

'अराप्पोर इयक्कम' ने अन्ना सलाई, टीटीके रोड, पूनमल्ली हाई रोड, गिंडी और तारामणि जैसे प्रमुख इलाकों में ऐसे ढांचों की पहचान की है। संगठन का आरोप है कि इनमें से कुछ ढांचे सड़कों और फुटपाथों तक फैले हुए हैं, जिससे पैदल चलने वालों को दिक्कत होती है। साथ ही, ये ऊंचाई, आकार और जगह से जुड़े नियमों का भी उल्लंघन करते हैं।

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मुख्यमंत्री और ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन (GCC) के कमिश्नर डॉ. जी.एस. समीरन सहित अन्य सरकारी अधिकारियों को दी गई शिकायत में, 'अराप्पोर इयक्कम' ने बताया कि उन्होंने इन सभी 23 होर्डिंग का मौके पर जाकर निरीक्षण किया, उनकी तस्वीरें लीं और उनकी लोकेशन का रिकॉर्ड तैयार किया है।

इन उल्लंघनों में अपोलो कैंसर अस्पताल के पास लगा एक होर्डिंग भी शामिल है, जिसकी ऊंचाई लगभग 82 फीट बताई जा रही है। अड्यार में एमजीएम (MGM) अस्पताल के पास एक और होर्डिंग है, जिस पर अस्पताल के 'इमरजेंसी' साइन को ढकने का आरोप है। जेमिनी फ्लाईओवर के पास लगे होर्डिंग भी तय ऊंचाई और आकार की सीमा से बड़े पाए गए हैं।

शिकायत में सैदापेट के अन्ना सलाई स्थित एक इमारत की चौथी मंजिल की छत पर लगे होर्डिंग का भी जिक्र है। नियम के अनुसार, दूसरी मंजिल से ऊपर होर्डिंग लगाना मना है, लेकिन यहां नियमों का उल्लंघन किया गया है।

अन्ना सलाई पर ही एक पेट्रोल पंप के पास लगा एक और ढांचा लगभग 80 फीट ऊंचा है, जो उसे दिए गए लाइसेंस में तय आकार से कहीं बड़ा है।

'अराप्पोर इयक्कम' का कहना है कि ये उल्लंघन नियमों को लागू करने में गंभीर लापरवाही को दर्शाते हैं। संगठन ने सवाल उठाया है कि लाइसेंस देने और निरीक्षण करने वाले अधिकारियों की जानकारी के बिना इतने बड़े ढांचे कैसे खड़े किए जा सकते हैं और उन्हें वहां रहने कैसे दिया जा सकता है?

संगठन ने 'तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज रूल्स, 2023' के नियम 337 के तहत समय-समय पर निरीक्षण न करने के लिए अधिकारियों की विफलता पर सवाल उठाए हैं। साथ ही, उन्होंने नगर निकाय के अधिकारियों और होर्डिंग एजेंसियों के बीच मिलीभगत की आशंका भी जताई है। अरप्पर इयक्कम ने नियमों का उल्लंघन करके जारी किए गए लाइसेंसों को रद्द करने और उन अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की मांग की है, जिन्होंने इन उल्लंघनों को मंजूरी दी या इन्हें जारी रहने दिया।

कई अध्ययनों से पता चला है कि चेन्नई जैसे तटीय शहर में होर्डिंग खतरनाक साबित हो सकते हैं। यहाँ अक्सर चक्रवात आते हैं और खारी हवाएं चलती हैं, जिनसे धातुओं में जंग लग जाता है।

पिछले साल मई में, प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए, GCC (ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन) ने होर्डिंग लगाने के लिए लाइसेंस जारी करने हेतु एक ऑनलाइन प्रणाली शुरू की और पुरानी ऑफलाइन प्रक्रिया को बंद कर दिया।

कॉर्पोरेशन ने कहा था कि बिना अनुमति के लगाए गए विज्ञापन बोर्डों पर 25,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा, और बार-बार नियम तोड़ने पर 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है। जुर्माने के अलावा, अवैध होर्डिंग को हटाने में जो खर्च आएगा, वह भी उन्हें लगाने वालों से ही वसूला जाएगा।

अरप्पर इयक्कम ने पूरे शहर में होर्डिंग के स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट (ढांचागत सुरक्षा जांच) की मांग की है। साथ ही, उन्होंने लाइसेंस से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की है, ताकि आम लोग भी इसकी जांच-पड़ताल कर सकें।

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