
चेन्नई: 'प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट' (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) मामलों की विशेष अदालत ने पूर्व मंत्री अनबिल महेश पोय्यामोझी की जमानत याचिका पर अपना आदेश 10 नवंबर तक के लिए टाल दिया है। यह मामला निजी स्कूलों को सरकारी मंजूरी देने से जुड़े कथित घोटाले से संबंधित है।
विशेष अदालत के न्यायाधीश एल. एस. सत्यमूर्ति ने यह फैसला तब लिया, जब अनबिल महेश की ओर से वरिष्ठ वकील अबुदु कुमार राजारत्नम और अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील (PP) आर. जॉन सत्यन ने अपनी-अपनी दलीलें पूरी कर लीं।
सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि महेश के, आरोपी अरासाकुमार और वी. मुथुकुमार के साथ करीबी संबंध थे। महेश की गिरफ्तारी के दो दिन के भीतर ही इन दोनों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। उन्होंने कहा कि सरवनन नाम का एक व्यक्ति अनबिल महेश के आवास पर पैसे लेकर आया था। पुलिस ने वीडियो सबूत जुटा लिए हैं। सरवनन फिलहाल फरार है। मान्यता की अवधि को बढ़ाकर 20 साल करने वाले सरकारी आदेश (GO) का मकसद निजी स्कूलों से अवैध वसूली करना था। उन्होंने आगे बताया कि जांच में पता चला है कि इस तरह 400 करोड़ रुपये तक की रकम जुटाई गई थी।
महेश के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल पर लगाए गए आरोप "झूठे" हैं और इनका कोई "पुख्ता आधार" नहीं है। उन्होंने उस वीडियो की सच्चाई पर भी सवाल उठाया, जिसे अभियोजन पक्ष इस बात का सबूत बता रहा है कि DMK नेता ने पैसे लिए थे। उन्होंने अदालत से कहा, "यह वीडियो खुद उसी व्यक्ति (सरवनन) ने बनाया और सोशल मीडिया पर अपलोड किया था। अभियोजन पक्ष इसी पर भरोसा कर रहा है, लेकिन इसमें पूर्व मंत्री का चेहरा तक नहीं दिख रहा है।





