
चेन्नई: सरकारी सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु वेटलैंड्स अथॉरिटी ने चेन्नई के पल्लीकरनई मार्श (दलदली इलाके) के आस-पास के बफर ज़ोन के कुछ हिस्सों में निर्माण की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। यह अनुमति कुछ शर्तों के साथ दी जाएगी ताकि रामसर-सूचीबद्ध वेटलैंड को बनाए रखने वाले जल निकासी चैनलों की सुरक्षा की जा सके।
सरकारी सूत्रों ने TNIE को बताया कि तमिलनाडु राज्य वेटलैंड्स अथॉरिटी ने मद्रास हाई कोर्ट को सौंपी अपनी स्टेटस रिपोर्ट में कहा है कि पूरे 'प्रभाव क्षेत्र' (ज़ोन ऑफ़ इन्फ्लुएंस) में निर्माण पर रोक लगाने की ज़रूरत नहीं है। इसके बजाय, इसे साइट की वैज्ञानिक और हाइड्रोलॉजिकल (जल-संबंधी) विशेषताओं के आधार पर नियंत्रित किया जा सकता है। संशोधित अंतरिम ज़ोन में 128.19 हेक्टेयर ज़मीन शामिल है, जो 36 सर्वे नंबरों में फैली है। इन नंबरों की पहचान ऐसी जगहों के तौर पर की गई है जो मार्श की हाइड्रोलॉजी को प्रभावित कर सकती हैं।
यह प्रस्ताव रियल एस्टेट डेवलपर्स (जैसे CREDAI चेन्नई, ओलंपिया टेक पार्क और नवीन हाउसिंग एंड प्रॉपर्टीज़) की आपत्तियों के बाद आया है। उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के 4 अगस्त के आदेश के बाद तय की गई शुरुआती सीमांकन (demarcation) पर आपत्ति जताई थी। अथॉरिटी ने मूल सीमा में किए गए बदलावों के दायरे का खुलासा नहीं किया है।
पता चला है कि अथॉरिटी को ज़मीन मालिकों, डेवलपर्स और अन्य लोगों से 23 आवेदन मिले थे। इनमें निजी स्वामित्व वाली पट्टा ज़मीन को बाहर करने, कुछ सर्वे वाले हिस्सों पर पुनर्विचार करने, मौजूदा इमारतों और विकास की अनुमतियों को मान्यता देने, और वेटलैंड की सीमा, इसके प्रभाव क्षेत्र और विकसित निजी ज़मीन के बीच स्पष्ट अंतर करने की मांग की गई थी।
7 सितंबर को कोर्ट के एक और आदेश के बाद, अधिकारियों ने 30 सितंबर को प्रस्तावित सीमा पर पुनर्विचार करने के लिए बैठक की। उन्होंने पानी के फैलाव, निचले इलाकों, जल निकासी चैनलों, खुली ज़मीन और निर्मित क्षेत्रों में बदलावों का आकलन करने के लिए पुरानी Google Earth तस्वीरों की जांच की। अलग-अलग ज़मीन के हिस्सों का उनकी हाइड्रोलॉजिकल कनेक्टिविटी, जल निकासी के रास्तों, आस-पास के वेटलैंड्स, मौजूदा बुनियादी ढांचे और ज़मीन के इस्तेमाल के आधार पर फिर से आकलन किया गया।





