
चेन्नई: ऐसी खबरें हैं कि अस्पताल कम कीमत पर दवाएं, मेडिकल डिवाइस और इस्तेमाल होने वाली चीज़ें खरीदते हैं, लेकिन मरीज़ों से उनके लिए प्रिंटेड मैक्सिमम रिटेल प्राइस (MRP) या उसके आस-पास की कीमत वसूलते हैं। इसे देखते हुए ड्रग्स कंट्रोल डायरेक्टरेट ने ड्रग्स इंस्पेक्टरों से चुनिंदा अस्पतालों और उनसे जुड़ी रिटेल फार्मेसियों की जांच करने को कहा है।
ड्रग्स कंट्रोल के असिस्टेंट डायरेक्टरों को 1 अक्टूबर को भेजे गए एक संदेश में, ड्रग्स कंट्रोल के जॉइंट डायरेक्टर और कंट्रोलिंग अथॉरिटी-कम-लाइसेंसिंग अथॉरिटी, एस गुरुभारती ने कहा कि इंस्पेक्टरों को खरीद के इनवॉइस, खरीद की कीमत, MRP, बिक्री की कीमत और बिलिंग की जांच करनी चाहिए और अगर कोई नियम का उल्लंघन पाया जाता है तो कार्रवाई शुरू करनी चाहिए।
अधिकारियों से कहा गया है कि वे अस्पतालों के ज़रिए सप्लाई की जाने वाली कुछ दवाओं और उनसे जुड़े स्टॉक रिकॉर्ड की प्रिंटेड MRP की जांच करें, खासकर महंगी दवाओं और इंजेक्शन पर ध्यान दें।
कीमत या लेबलिंग के नियमों का उल्लंघन, ज़्यादा कीमत वसूलने का शक, रिकॉर्ड में गड़बड़ी या कोई भी बड़ा अंतर पाए जाने पर उसे ठीक से रिकॉर्ड किया जाना चाहिए और उससे जुड़े ज़रूरी दस्तावेज़ होने चाहिए।





