
कोयंबटूर: किसानों की ओर से फसल ऋण पूरी तरह माफ़ करने की ज़ोरदार मांग के बीच, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ के रजिस्ट्रार (RCS) ने कोऑपरेटिव सोसायटियों और बैंकों को पूरे राज्य में वसूली की कार्रवाई को कुछ समय के लिए रोकने का निर्देश दिया है। सोसायटियों से यह भी कहा गया है कि वे सुनिश्चित करें कि जिन किसानों ने अपने पिछले ऋण पूरी तरह चुका दिए हैं, उन्हें 30 सितंबर तक नए ऋण दिए जाएं।
सोमवार को जारी एक सर्कुलर में, RCS जी. लता ने कहा कि सरकार के ध्यान में यह बात आई है कि कोऑपरेटिव बैंक और सोसायटियां उन किसानों के खिलाफ वसूली के कड़े कदम उठा रही थीं, जिन्हें 'क्रॉप लोन वेवर स्कीम 2026' के तहत आंशिक माफ़ी का लाभ तो मिला था, लेकिन उन्होंने बाकी बची रकम पूरी तरह नहीं चुकाई थी।
इस स्थिति को देखते हुए, लता ने निर्देश दिया कि बकाया फसल ऋणों से जुड़ी वसूली की सभी कार्रवाइयों को अगले आदेश तक रोक दिया जाए।
तमिलनाडु कोऑपरेटिव विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि 31 दिसंबर, 2025 तक 15,108 करोड़ रुपये के फसल ऋण जारी किए गए थे, जबकि 1 मई, 2025 और 28 फरवरी, 2026 के बीच दिए गए ऋणों में से 5,932.23 करोड़ रुपये के ऋण 2026 की योजना के तहत माफ़ी के लिए पात्र थे।
रजिस्ट्रार ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि जिन किसानों ने अपने फसल ऋण पूरी तरह चुका दिए हैं और जिन पर कोई बकाया नहीं है, उन्हें 30 सितंबर तक नए फसल ऋण दिए जाएं। यह सर्कुलर क्षेत्रीय संयुक्त रजिस्ट्रारों और ज़िला केंद्रीय कोऑपरेटिव बैंकों के प्रबंध निदेशकों को जारी किया गया था।





