तमिलनाडू

तमिलनाडु सरकार लाखों रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज़ करेगी

Subhi
2 Sept 2026 11:02 AM IST
तमिलनाडु सरकार लाखों रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज़ करेगी
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चेन्नई: तमिलनाडु के रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने एक बड़े डिजिटाइज़ेशन प्रोजेक्ट के लिए टेंडर निकाला है। इसका मकसद 1865 से लेकर अब तक के प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और लाखों जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड को ऐसे डिजिटल डेटाबेस में बदलना है जिन्हें आसानी से खोजा जा सके।

रजिस्ट्रेशन के इंस्पेक्टर जनरल जी.के. अरुण सुंदर थायलन ने TNIE को बताया कि सरकार ने 2.23 करोड़ डॉक्यूमेंट्स के डिजिटाइज़ेशन को मंज़ूरी दी है। इनमें औसतन पांच पेज प्रति डॉक्यूमेंट के हिसाब से कुल 11.15 करोड़ पेज शामिल हैं, जो इसे राज्य का अब तक का सबसे बड़ा डिजिटाइज़ेशन प्रोजेक्ट बनाता है। यह प्रोजेक्ट 1865 और जुलाई 2009 के बीच रजिस्टर हुए पुराने प्रॉपर्टी डॉक्यूमेंट्स को स्कैन करने के पिछले अभियान में रह गई कमियों को दूर करेगा।

इस प्रोजेक्ट से पुराने प्रॉपर्टी रिकॉर्ड को खोजना और हासिल करना आसान हो जाएगा। साथ ही, मालिकाना हक के इतिहास की जांच करना और नकली या डुप्लीकेट ट्रांज़ैक्शन का पता लगाना भी आसान होगा, जिससे धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। इसमें लगभग 23 लाख पेज शामिल होंगे, और साथ ही करीब 5.69 करोड़ जन्म-मृत्यु रिकॉर्ड का डेटा भी दर्ज किया जाएगा।

विभाग 1865 और 1974 के बीच रजिस्टर हुए डॉक्यूमेंट्स से प्रॉपर्टी पर किसी तरह के कानूनी दावे या बोझ (encumbrance) से जुड़ी जानकारी भी डिजिटल रूप से दर्ज करेगा। इसमें नौ ज़ोन — चेन्नई, कुड्डालोर, कोयंबटूर, मदुरै, सलेम, तिरुनेलवेली, तंजावुर, तिरुचि और वेल्लोर — के 581 सब-रजिस्ट्रार ऑफिसों में मौजूद लगभग 7.06 करोड़ डॉक्यूमेंट्स को शामिल किए जाने की उम्मीद है। प्रोसेस और वेरिफाई होने के बाद, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड को रजिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म 'STAR 2.0' पर ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट के 14 महीनों में पूरा होने की उम्मीद है। डिजिटाइज़ेशन का काम 13वें महीने तक पूरा करने का लक्ष्य है और आखिरी महीना वेरिफिकेशन और हैंडओवर के लिए रखा गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए विभाग को 1.2 पेटाबाइट स्टोरेज सिस्टम की ज़रूरत होगी।

डेटा-सिक्योरिटी और एक्सेस-कंट्रोल के इंतज़ामों पर थायलन ने कहा कि डिजिटाइज़ेशन प्रोसेस में ऐसे कंट्रोल शामिल होंगे जिनसे हर बैच के लिए ऑडिट ट्रेल बनाया जा सके। डिजिटल सिग्नेचर लगाने से पहले विभाग के अधिकारी फ़िंगरप्रिंट का इस्तेमाल करके बैच को ऑथेंटिकेट करेंगे।

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