तमिलनाडू

कोयंबटूर से नौसेना का सेलर गिरफ्तार, पाकिस्तानी एजेंट से संपर्क का आरोप

nidhi
4 Oct 2026 10:38 AM IST
कोयंबटूर से नौसेना का सेलर गिरफ्तार, पाकिस्तानी एजेंट से संपर्क का आरोप
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पाकिस्तानी खुफिया एजेंट से संपर्क के आरोप में गिरफ्तार

कोयंबटूर : भारतीय नौसेना के एक सेलर को कथित हनीट्रैप और संवेदनशील जानकारी साझा करने के मामले में कोयंबटूर से गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि वह एक पाकिस्तानी खुफिया एजेंट के संपर्क में था और उसके साथ महत्वपूर्ण जानकारी साझा कर रहा था। गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने किस तरह की सूचनाएं साझा कीं और संपर्क कब से चल रहा था।

प्रारंभिक आरोपों के मुताबिक नौसेना का सेलर सोशल मीडिया या ऑनलाइन माध्यम के जरिए एक संदिग्ध प्रोफाइल के संपर्क में आया था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इसी संपर्क के दौरान उसे हनीट्रैप में फंसाया गया। इसके बाद कथित तौर पर उससे नौसेना और सुरक्षा से जुड़ी जानकारियां हासिल करने की कोशिश की गई। मामला सामने आने के बाद सेलर की गतिविधियों और डिजिटल संपर्कों की जांच शुरू की गई। उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों की जांच से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि संदिग्ध व्यक्ति के साथ कितनी बातचीत हुई और कौन-कौन सी जानकारी साझा की गई।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी है कि कथित पाकिस्तानी एजेंट ने संपर्क स्थापित करने के लिए किस पहचान का इस्तेमाल किया था। सुरक्षा एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि संदिग्ध प्रोफाइल वास्तविक व्यक्ति की थी या फर्जी पहचान बनाकर सेलर को जाल में फंसाया गया था। कोयंबटूर से गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियों की प्राथमिकता यह पता लगाना है कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। आरोपी के संपर्क में रहे अन्य लोगों और डिजिटल लेन-देन की भी जांच की जा सकती है।
हनीट्रैप का इस्तेमाल खुफिया जानकारी जुटाने के लिए लंबे समय से एक चुनौती माना जाता रहा है। इसमें पहले सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से दोस्ती और भरोसा कायम किया जाता है। इसके बाद व्यक्तिगत बातचीत के जरिए लक्ष्य से जानकारी हासिल करने या उस पर दबाव बनाने की कोशिश की जा सकती है।
सशस्त्र बलों से जुड़े कर्मियों के लिए सोशल मीडिया और अनजान ऑनलाइन संपर्कों को लेकर विशेष सतर्कता जरूरी होती है। सैन्य प्रतिष्ठानों, तैनाती, गतिविधियों या अन्य संवेदनशील मामलों से संबंधित छोटी जानकारी भी कई बार अलग-अलग सूचनाओं को जोड़ने में इस्तेमाल की जा सकती है। इस मामले में अभी जांच जारी है। आरोपी ने वास्तव में कौन सी जानकारी साझा की, उससे राष्ट्रीय सुरक्षा को कितना नुकसान हुआ और कथित पाकिस्तानी संपर्क के पीछे कौन लोग थे, इन सवालों के जवाब विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएंगे।
सुरक्षा एजेंसियां डिजिटल फोरेंसिक के जरिए आरोपी के उपकरणों और ऑनलाइन गतिविधियों की पड़ताल कर सकती हैं। संपर्क की समयरेखा तैयार करने के साथ यह भी देखा जाएगा कि किसी तरह का आर्थिक लेन-देन या अन्य लाभ दिया गया था या नहीं। फिलहाल नौसेना के सेलर की गिरफ्तारी के बाद मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी। यह मामला एक बार फिर संवेदनशील पदों पर तैनात कर्मियों के लिए डिजिटल सुरक्षा और संदिग्ध ऑनलाइन संपर्कों से सतर्क रहने की जरूरत को सामने लाता है।
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