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AI की बढ़ती ताकत पर भिक्षु की चेतावनी, कहा- इंसान की सोच और चेतना पर पड़ सकता है गहरा असर

Tulsi Rao
8 Nov 2026 12:46 PM IST
AI की बढ़ती ताकत पर भिक्षु की चेतावनी, कहा- इंसान की सोच और चेतना पर पड़ सकता है गहरा असर
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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच आध्यात्मिक जगत से भी इसके भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण चेतावनी सामने आई है। बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के वरिष्ठ संत ब्रह्मविहारी स्वामी ने एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026 में AI की संभावनाओं और इसके मानव जीवन पर पड़ने वाले गहरे प्रभावों पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि AI केवल एक नई तकनीकी खोज नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन और सोचने के तरीके को बदलने की क्षमता रखती है।

स्वामी ब्रह्मविहारी ने AI की तुलना मानव इतिहास के बड़े आविष्कारों से की। उन्होंने कहा कि आग, पहिए और बिजली के बल्ब जैसे आविष्कारों ने मनुष्य के बाहरी जीवन को बदल दिया, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रभाव इससे कहीं आगे जा सकता है। उनके अनुसार, यह तकनीक इंसान की सोच, व्यवहार और संबंधों को भी प्रभावित कर सकती है।

उन्होंने AI को मानव इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धियों में से एक बताते हुए कहा कि इसकी बढ़ती क्षमताओं को समझना बेहद जरूरी है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीकी विकास के साथ मानवीय मूल्यों और नैतिक जिम्मेदारियों की रक्षा भी होनी चाहिए।

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने AI एजेंटों की बढ़ती स्वायत्तता का उल्लेख किया। उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में ऐसी प्रणालियां विकसित हो सकती हैं, जो पहले की मशीनों की तुलना में कहीं अधिक स्वतंत्र रूप से काम करेंगी। उनके मुताबिक, इस बदलाव से मानव समाज के सामने नए नैतिक और दार्शनिक प्रश्न खड़े होंगे।

स्वामी ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि AI के अधिक मानवीय बनने से भी बड़ा खतरा यह हो सकता है कि मनुष्य स्वयं मशीनों की तरह सोचने लगे। उन्होंने कहा कि यदि लोग अपनी सोच और निर्णय लेने की क्षमता के लिए तकनीक पर अत्यधिक निर्भर होने लगेंगे, तो इसका असर मानवीय संबंधों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का विकास रोकना समाधान नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि AI का उपयोग मानव हित में हो और उस पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखा जाए। उन्होंने तकनीकी जोखिमों का सामना विवेक और विश्वास के साथ करने की बात कही।

इसी सम्मेलन में वेदांत के विद्वान स्वामी सर्वप्रियानंद ने भी AI और चेतना के बीच अंतर पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी मशीन का जटिल सवालों का जवाब देना या मनुष्यों से बेहतर बौद्धिक प्रदर्शन करना अपने आप में इस बात का प्रमाण नहीं है कि उसमें चेतना या अनुभव करने की क्षमता मौजूद है।

स्वामी सर्वप्रियानंद ने कहा कि बुद्धिमत्ता और चेतना दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं। उन्होंने वेदांत दर्शन के आधार पर समझाया कि विचार करने की क्षमता और अपने अनुभवों के प्रति जागरूक होना एक ही बात नहीं है।

AI के विकास को लेकर दोनों आध्यात्मिक विचारकों की चर्चाओं ने यह प्रश्न सामने रखा है कि भविष्य में मनुष्य और मशीन के बीच संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे। तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच मानवीय संवेदनाओं, नैतिकता और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता को सुरक्षित रखना एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।

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