
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। DMK अध्यक्ष और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोमवार को आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK ने जमीन पर कोई ठोस चुनावी काम नहीं किया, बल्कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करके लोगों को प्रभावित कर 23 अप्रैल के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की।
एक कार्यक्रम में बोलते हुए स्टालिन ने अपनी पार्टी के संगठनात्मक प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि DMK ने लगातार जनसंपर्क, सम्मेलन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कार्यों पर ध्यान दिया है, ताकि चुनावी प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके।
स्टालिन ने बिना सीधे TVK का नाम लिए आरोप लगाया कि प्रतिद्वंद्वी पार्टी ने कई क्षेत्रों में न तो व्यापक फील्ड वर्क किया और न ही पर्याप्त संख्या में काउंटिंग एजेंट तैनात किए। इसके बावजूद चुनाव में सफलता हासिल होना एक गंभीर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल रणनीतिक तरीके से किया गया, जिसके जरिए युवाओं और बच्चों के माध्यम से परिवारों के मतदाताओं तक संदेश पहुंचाया गया। स्टालिन के अनुसार, यह तरीका पारंपरिक चुनावी गतिविधियों की तुलना में अधिक प्रभावी साबित हुआ और DMK की नजर से कुछ हद तक यह रणनीति छूट गई।
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि DMK अब इस तरह की सोशल मीडिया आधारित रणनीतियों को गंभीरता से ले रही है और भविष्य में इसे लेकर अधिक सतर्क रहेगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पार्टी ने ऐसे डिजिटल अभियानों की निगरानी और मुकाबले के लिए नई योजनाएं तैयार करना शुरू कर दिया है।
उनके इस बयान को तमिलनाडु की बदलती राजनीतिक रणनीति के संकेत के रूप में देखा जा रहा है, जहां अब पारंपरिक चुनावी प्रचार के साथ-साथ डिजिटल और सोशल मीडिया अभियान भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टालिन का यह बयान आने वाले समय में चुनावी रणनीतियों में बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। खासकर युवा मतदाताओं को प्रभावित करने में सोशल मीडिया की बढ़ती भूमिका को अब सभी प्रमुख दल गंभीरता से लेने लगे हैं।
कुल मिलाकर, एमके स्टालिन के इस बयान ने राज्य की राजनीति में सोशल मीडिया की भूमिका और चुनावी रणनीति को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है, और आने वाले चुनावों में डिजिटल प्रचार और भी महत्वपूर्ण हो सकता है।





