तमिलनाडू

पुस्तकालयों को लेकर एम.के. स्टालिन का बड़ा बयान, युवाओं से की खास अपील

Ratna Netam
4 Nov 2026 2:24 PM IST
पुस्तकालयों को लेकर एम.के. स्टालिन का बड़ा बयान, युवाओं से की खास अपील
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कोयंबटूर। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने बुधवार (4 नवंबर 2026) को कोयंबटूर के दौरे के दौरान युवाओं को शिक्षा, पुस्तक अध्ययन और ज्ञान अर्जित करने के लिए प्रेरित किया। पेरियार अरिवुलगम पुस्तकालय एवं विज्ञान केंद्र से जुड़े कार्यक्रम के अवसर पर स्टालिन ने युवाओं से पुस्तकालयों का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को किताबें पढ़ने और अपना ज्ञान बढ़ाने की आदत विकसित करनी चाहिए। उनके इस संदेश में शिक्षा के महत्व और समाज के बौद्धिक विकास पर विशेष जोर दिया गया।स्टालिन का कोयंबटूर दौरा राजनीतिक और शैक्षणिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान वह द्रविड़र कड़गम की ओर से आयोजित सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंचे। यह कार्यक्रम लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित पेरियार अरिवुलगम पुस्तकालय एवं विज्ञान केंद्र के निर्माण में उनके योगदान को लेकर आयोजित किया गया। इस परियोजना की आधारशिला स्टालिन ने 6 नवंबर 2024 को तत्कालीन मुख्यमंत्री के रूप में रखी थी।
युवाओं को पुस्तकालयों से जुड़ने का संदेश
स्टालिन ने युवाओं के लिए पढ़ने की आदत को महत्वपूर्ण बताते हुए पुस्तकालयों का नियमित उपयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किताबें ज्ञान प्राप्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। पुस्तकालयों में विभिन्न विषयों से संबंधित सामग्री उपलब्ध होती है, जिसका लाभ विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं और शोधकर्ताओं को मिल सकता है।उनके संदेश का प्रमुख उद्देश्य युवाओं को अध्ययन के प्रति जागरूक करना और उन्हें ज्ञान के नए अवसरों से जोड़ना था। आज के डिजिटल युग में जानकारी प्राप्त करना पहले की तुलना में आसान हो गया है, लेकिन व्यवस्थित अध्ययन और विषयों की गहरी समझ विकसित करने के लिए पुस्तकालयों की उपयोगिता बनी हुई है।पुस्तकालय केवल किताबें रखने के स्थान नहीं हैं, बल्कि ये विचारों के आदान-प्रदान, शोध और नई खोजों को बढ़ावा देने वाले महत्वपूर्ण संस्थान भी हैं।
करीब 300 करोड़ रुपये से तैयार हुआ आधुनिक ज्ञान केंद्र
कोयंबटूर में स्थापित पेरियार अरिवुलगम पुस्तकालय एवं विज्ञान केंद्र तमिलनाडु की महत्वपूर्ण शैक्षणिक परियोजनाओं में शामिल है। इसका निर्माण लगभग सात एकड़ भूमि पर किया गया है। इस आधुनिक परिसर में विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के लिए अध्ययन और विज्ञान से संबंधित सुविधाएं विकसित की गई हैं।करीब 1.98 लाख वर्ग फुट में बने इस बहुमंजिला केंद्र में तमिल और अंग्रेजी भाषा की पुस्तकों के लिए अलग-अलग विभाग, बच्चों की लाइब्रेरी, डिजिटल पुस्तकालय और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष अध्ययन क्षेत्र उपलब्ध हैं।इसके अतिरिक्त परिसर में विज्ञान केंद्र, आधुनिक कंप्यूटर सुविधाएं, डिजिटल अध्ययन सामग्री और नवाचार को प्रोत्साहित करने वाला इनक्यूबेशन सेंटर भी स्थापित किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक पुस्तकों के साथ आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों को मिलेगा लाभ
पेरियार अरिवुलगम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए उपलब्ध अध्ययन सुविधाएं शामिल हैं। यहां विभिन्न विषयों की पुस्तकें, संदर्भ सामग्री और अध्ययन के लिए विशेष स्थान उपलब्ध कराए गए हैं।इससे उन विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिल सकता है, जो सरकारी नौकरियों और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। सार्वजनिक पुस्तकालय आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के विद्यार्थियों के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं, क्योंकि महंगी अध्ययन सामग्री खरीदना हर छात्र के लिए संभव नहीं होता।वहीं, डिजिटल लाइब्रेरी और ई-बुक जैसी सुविधाएं युवाओं को नई तकनीक के माध्यम से पढ़ाई करने का अवसर प्रदान करती हैं।
पेरियार के विचारों से जुड़ा है ज्ञान केंद्र
इस पुस्तकालय का नाम समाज सुधारक ई.वी. रामासामी पेरियार के नाम पर रखा गया है। पेरियार को तमिलनाडु में सामाजिक न्याय, तर्कवाद, समानता और शिक्षा के प्रसार के लिए जाना जाता है।उनके विचारों में शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है। इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए इस ज्ञान केंद्र को विकसित किया गया है।पुस्तकालय में साहित्य, इतिहास, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन और अन्य विषयों की सामग्री उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को विभिन्न दृष्टिकोणों को समझने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही बच्चों के लिए तैयार विशेष अध्ययन सुविधाएं कम उम्र से ही पढ़ने की आदत विकसित करने में सहायक हो सकती हैं।
पुस्तकालय के निर्माण को लेकर राजनीतिक चर्चा
पेरियार अरिवुलगम के निर्माण और उद्घाटन को लेकर तमिलनाडु की राजनीति में भी चर्चा रही है। इस परियोजना की शुरुआत डीएमके सरकार के कार्यकाल में हुई थी, जबकि इसका उद्घाटन 16 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने किया।इससे पहले स्टालिन ने परियोजना को लेकर कहा था कि किसी सार्वजनिक संस्थान की वास्तविक उपलब्धि उसकी परिकल्पना करने और उसे तैयार करने में निहित होती है। उन्होंने कोयंबटूर के नागरिकों से इस ज्ञान केंद्र का नियमित उपयोग करने की अपील भी की थी।
शिक्षा और ज्ञान से मजबूत होगा भविष्य
स्टालिन का पुस्तकालयों के उपयोग को लेकर दिया गया संदेश ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब युवा तेजी से डिजिटल माध्यमों पर निर्भर हो रहे हैं। इंटरनेट और ऑनलाइन अध्ययन सामग्री की उपलब्धता के बावजूद पुस्तकों का व्यवस्थित अध्ययन ज्ञान को गहराई प्रदान करता है।शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित पुस्तक अध्ययन से भाषा कौशल, विश्लेषण क्षमता, रचनात्मक सोच और निर्णय लेने की क्षमता विकसित हो सकती है। साथ ही विभिन्न विषयों का अध्ययन युवाओं को सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति अधिक जागरूक बनाता है।कोयंबटूर का पेरियार अरिवुलगम पुस्तकालय एवं विज्ञान केंद्र विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए ज्ञान प्राप्त करने का महत्वपूर्ण स्थान बन सकता है। स्टालिन का संदेश भी इसी दिशा में युवाओं को पढ़ने, सीखने और अपने बौद्धिक विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रेरित करता है।
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