
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु में कैबिनेट नियुक्तियों को लेकर उठे जातिगत विवाद के बीच हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट्स (HR&CE) मंत्री एस. रमेश ने शनिवार को अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि TVK सरकार में मंत्रियों का चयन जाति के आधार पर नहीं, बल्कि पार्टी के सेक्युलर और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के अनुसार किया गया है।
मंत्री रमेश ने कहा कि कैबिनेट में शामिल सभी सदस्यों को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार की नीतियों और विचारधारा के आधार पर चुना गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल में नियुक्तियों का उद्देश्य प्रशासनिक संतुलन और सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, न कि जातिगत आधार पर किसी विशेष वर्ग को प्राथमिकता देना।
रमेश ने उन सवालों पर भी प्रतिक्रिया दी जिनमें उनकी ब्राह्मण पहचान को लेकर उनके विभागीय नियुक्ति में भूमिका होने की बात कही जा रही थी। उन्होंने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी तरह गलत धारणा है और राजनीतिक रूप से प्रेरित चर्चा है।
उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता ने वोट पार्टी और उसके नेता के प्रति विश्वास के आधार पर दिए थे, न कि व्यक्तिगत उम्मीदवारों या उनकी जातिगत पहचान के आधार पर। उनके अनुसार, जनादेश पार्टी की नीतियों और मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व के समर्थन में था।
मंत्री ने यह भी कहा कि TVK सरकार का उद्देश्य सभी समुदायों को समान अवसर देना और प्रशासन में समावेशिता सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह के भेदभाव को बढ़ावा नहीं देती।
एस. रमेश 23 अप्रैल के चुनाव में TVK टिकट पर श्रीरंगम विधानसभा सीट से विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्हें कैबिनेट में हिंदू धार्मिक एवं चैरिटेबल एंडोमेंट्स विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई।
राजनीतिक हलकों में उनके बयान को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के दिनों में कैबिनेट में जातिगत प्रतिनिधित्व को लेकर बहस तेज हुई है। विपक्षी दलों द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद सरकार पर पारदर्शिता और संतुलन बनाए रखने का दबाव बढ़ा है।
हालांकि, मंत्री रमेश ने स्पष्ट किया कि सरकार का ध्यान केवल विकास और सामाजिक न्याय पर केंद्रित है, और जाति आधारित राजनीति को बढ़ावा देने का कोई इरादा नहीं है।
कुल मिलाकर, यह मामला तमिलनाडु की राजनीति में जाति और प्रतिनिधित्व को लेकर चल रही बहस को और तेज करता दिख रहा है, जबकि सरकार अपने फैसलों को सामाजिक न्याय और समावेशिता के सिद्धांतों पर आधारित बता रही है।





