
Tamil Nadu तमिलनाडु: प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। PMK नेता अंबुमणि रामदास ने शुक्रवार को केंद्र सरकार से अपील की कि वह कर्नाटक द्वारा तैयार की गई डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को स्वीकार न करे।
अपने बयान में अंबुमणि रामदास ने कहा कि तमिलनाडु सरकार को केंद्र पर दबाव बनाना चाहिए ताकि 2018 में दी गई वह अनुमति रद्द की जाए, जिसमें राज्य की सहमति के बिना कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध के लिए ड्राफ्ट प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने की इजाज़त दी गई थी।
उन्होंने कहा कि यह निर्णय कावेरी जल बंटवारे से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को प्रभावित कर सकता है और इससे तमिलनाडु के हितों पर असर पड़ेगा। उनका कहना है कि इस तरह की परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से पहले सभी संबंधित राज्यों की सहमति आवश्यक है।
इस बीच, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार द्वारा दिए गए हालिया बयान का भी अंबुमणि ने विरोध किया। शिवकुमार ने कहा था कि तमिलनाडु को मेकेदातु बांध परियोजना का विरोध करने का अधिकार नहीं है। इस टिप्पणी को अंबुमणि रामदास ने “निंदनीय” करार दिया।
उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान संघीय ढांचे और अंतर-राज्यीय जल विवादों के समाधान की प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। उनके अनुसार, कावेरी जल विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट और जल प्राधिकरण के तहत विचाराधीन है, इसलिए किसी भी राज्य को एकतरफा कदम नहीं उठाना चाहिए।
मेकेदातु परियोजना को लेकर लंबे समय से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मतभेद बने हुए हैं। यह मुद्दा नदी जल बंटवारे, पर्यावरणीय प्रभाव और जल संसाधन प्रबंधन से जुड़ा हुआ है, जिस पर दोनों राज्यों की अलग-अलग राय रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के विवादों का समाधान केवल संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से ही संभव है, ताकि किसी भी राज्य के हितों को नुकसान न पहुंचे।
फिलहाल, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी के बाद मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।





