तमिलनाडू

Theni जेलब्रेक केस में पुलिस को बड़ी सफलता, फरार दोनों भाइयों ने किया सरेंडर

Ratna Netam
28 Oct 2026 6:10 PM IST
Theni जेलब्रेक केस में पुलिस को बड़ी सफलता, फरार दोनों भाइयों ने किया सरेंडर
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चेन्नई/थेनी : 28 अक्टूबर 2026। तमिलनाडु के थेनी जिले की जिला जेल से 17 विचाराधीन कैदियों के फरार होने के सनसनीखेज मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। बुधवार को फरार चल रहे आखिरी दो कैदियों ने भी पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। दोनों आपस में भाई हैं और उनकी पहचान तिरुपति तथा मीनाक्षी सुंदरम के रूप में हुई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों भाई अपने वकील के साथ गुडलूर पुलिस स्टेशन पहुंचे और आत्मसमर्पण किया। इससे पहले पुलिस 15 फरार कैदियों को पकड़ चुकी थी। इसके साथ ही 26 अक्टूबर की रात थेक्कमपट्टी जिला जेल से भागे सभी 17 कैदी दोबारा पुलिस की गिरफ्त में आ गए हैं। इस घटना ने तमिलनाडु की जेल सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
वकील के साथ थाने पहुंचे दोनों फरार भाई
थेनी जिले के थेक्कमपट्टी स्थित जिला जेल से भागे तिरुपति और मीनाक्षी सुंदरम को पकड़ने के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही थी। बुधवार शाम दोनों भाइयों ने अपने वकील के साथ गुडलूर पुलिस स्टेशन में आत्मसमर्पण कर दिया।इससे पहले पुलिस अधिकारियों ने बताया था कि 17 में से 15 कैदियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और दो की तलाश जारी है।दोनों भाइयों के आत्मसमर्पण के बाद यह तलाश समाप्त हो गई। हालांकि, अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि फरार होने के बाद दोनों कहां छिपे थे और उन्हें किसी बाहरी व्यक्ति से सहायता मिली थी या नहीं।आत्मसमर्पण की यह जानकारी बुधवार शाम प्रकाशित स्थानीय रिपोर्ट में सामने आई।
26 अक्टूबर की रात जेल से फरार हुए थे 17 कैदी
यह पूरी घटना सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 की रात हुई थी। थेनी जिले के आंडीपट्टी के पास थेक्कमपट्टी में स्थित जिला जेल से 17 विचाराधीन कैदी सुरक्षा व्यवस्था को चकमा देकर भाग निकले थे।पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि कैदियों ने जेल कर्मचारियों को धोखे में डालने के लिए मेडिकल इमरजेंसी का नाटक किया।बताया गया कि एक कैदी ने मिर्गी का दौरा पड़ने का अभिनय किया। अन्य कैदियों ने उसकी हालत खराब होने का शोर मचाया।जब जेल कर्मचारी सहायता करने पहुंचे, तो कुछ कैदियों ने कथित तौर पर उन पर हमला कर दिया।इसके बाद कैदी जेल से बाहर निकलने में सफल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस में हड़कंप मच गया।
जेल कर्मचारियों पर हमला कर भागे कैदी
जांच में सामने आया कि कैदियों ने मेडिकल इमरजेंसी का फायदा उठाकर जेल की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया।बताया गया कि तीसरे ब्लॉक में बंद कैदियों ने एक साथी की तबीयत बिगड़ने का नाटक किया था।जब सुरक्षाकर्मी वहां पहुंचे, तो उन पर हमला किया गया। इस दौरान एक जेल कर्मचारी के सिर में चोट लगने की जानकारी भी सामने आई।कैदी मुख्य प्रवेश द्वार से बाहर निकलने में सफल हुए।घटना के बाद जेल प्रशासन की सुरक्षा प्रक्रिया, आपातकालीन परिस्थितियों में अपनाए जाने वाले नियमों और कर्मचारियों की तैनाती की जांच शुरू की गई।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
300 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने चलाया तलाशी अभियान
17 कैदियों के एक साथ फरार होने के बाद तमिलनाडु पुलिस ने बड़े स्तर पर तलाशी अभियान शुरू किया।थेनी और आसपास के इलाकों में विशेष पुलिस दल तैनात किए गए। शुरुआती चरण में 17 विशेष टीमें बनाई गई थीं।बाद में अभियान में 300 से अधिक पुलिसकर्मी, अपराध शाखा के अधिकारी और विशेष दल शामिल हुए।कैदियों के जंगलों और पहाड़ी इलाकों में छिपने की आशंका को देखते हुए ड्रोन कैमरों की सहायता भी ली गई।पुलिस ने आसपास के रास्तों पर नाकाबंदी की और वाहनों की जांच तेज कर दी।केरल सीमा से लगे इलाकों में भी सतर्कता बढ़ाई गई, ताकि फरार कैदी दूसरे राज्य में प्रवेश न कर सकें।
पहले 13, फिर 15 और आखिर में सभी 17 पकड़े गए
फरार कैदियों की तलाश के दौरान पुलिस को अलग-अलग चरणों में सफलता मिली।27 अक्टूबर की सुबह पांच कैदियों को पकड़ा गया था। इसके बाद उसी दिन आठ अन्य कैदियों को भी हिरासत में लिया गया।इस प्रकार मंगलवार तक 13 कैदी पुलिस के कब्जे में आ चुके थे।बुधवार को पुलिस ने रेजिन और पोनमुथु सेल्वम नामक दो और फरार कैदियों को पहाड़ी इलाके से गिरफ्तार किया।इसके बाद गिरफ्तार कैदियों की संख्या 15 हो गई थी।अंत में बुधवार शाम तिरुपति और मीनाक्षी सुंदरम के आत्मसमर्पण के बाद सभी 17 कैदियों की गिरफ्तारी की स्थिति स्पष्ट हुई।
सुरक्षा में लापरवाही पर नौ जेल कर्मचारी निलंबित
इतनी बड़ी संख्या में कैदियों के भागने के बाद तमिलनाडु जेल विभाग ने सख्त कार्रवाई की है।जेल विभाग के पुलिस महानिदेशक संदीप राय राठौर ने सुरक्षा में कथित लापरवाही के मामले में नौ जेल कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश दिया।निलंबित कर्मचारियों में तीन हेड कांस्टेबल सहित अन्य जेल कर्मचारी शामिल बताए गए हैं।अधिकारियों का कहना है कि घटना में सुरक्षा संबंधी नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही है।इस बात की भी पड़ताल हो रही है कि जेल कर्मचारियों से चाबियां कैसे छीनी गईं और कैदी मुख्य द्वार तक पहुंचने में कैसे सफल हुए।
क्षमता से ज्यादा कैदी होने पर उठे सवाल
थेनी जेल से हुई इस घटना ने जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों को रखने की समस्या भी सामने ला दी है।रिपोर्टों के मुताबिक, थेक्कमपट्टी जिला जेल में 200 कैदियों को रखने की निर्धारित क्षमता थी, लेकिन घटना के समय वहां लगभग 334 कैदी बंद थे।अर्थात जेल में निर्धारित क्षमता से काफी अधिक कैदी मौजूद थे।इस स्थिति ने कर्मचारियों की संख्या, निगरानी व्यवस्था और जेल प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि क्षमता से अधिक कैदी होने पर सुरक्षा व्यवस्था और दैनिक प्रबंधन की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।हालांकि, इस घटना के लिए भीड़भाड़ किस हद तक जिम्मेदार थी, यह विस्तृत जांच से स्पष्ट होगा।
जेल से फरार होने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निर्देश
थेनी जेलकांड के बाद तमिलनाडु जेल विभाग ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आवश्यक परिस्थितियों में कैदियों के फरार होने की कोशिश रोकने के लिए जेल सुरक्षाकर्मियों को नियमानुसार आग्नेयास्त्रों के इस्तेमाल की अनुमति संबंधी निर्देश दिए गए हैं।इनका उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना बताया गया है।इसके साथ ही जेलों में कर्मचारियों की सतर्कता, आपातकालीन प्रतिक्रिया और प्रवेश द्वारों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।
तमिलनाडु में तीन दशक की बड़ी जेलब्रेक घटनाओं में शामिल
थेनी की घटना को तमिलनाडु में पिछले लगभग तीन दशकों की प्रमुख जेलब्रेक घटनाओं में गिना जा रहा है।इससे पहले वर्ष 1995 में वेल्लोर किले के भीतर स्थित एक विशेष हिरासत केंद्र से लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम से जुड़े 43 संदिग्ध सदस्य सुरंग बनाकर फरार हुए थे।थेनी में 17 कैदियों के एक साथ भागने से जेल सुरक्षा पर फिर गंभीर चर्चा शुरू हुई है।हालांकि, इस बार पुलिस ने दो दिनों के भीतर अधिकांश कैदियों को पकड़ लिया और शेष दो ने आत्मसमर्पण कर दिया।
सभी कैदी पकड़े गए, अब जांच पर टिकी निगाहें
थेनी जिला जेल से फरार हुए सभी 17 कैदियों के दोबारा पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद तलाशी अभियान का प्रमुख उद्देश्य पूरा हो गया है।लेकिन इस घटना से जुड़े कई सवाल अभी बाकी हैं। पुलिस को यह पता लगाना है कि कैदियों ने भागने की योजना कब बनाई और जेल की सुरक्षा व्यवस्था में किन कमियों का फायदा उठाया।जेल विभाग कर्मचारियों की कथित लापरवाही और घटना के दौरान अपनाई गई प्रक्रियाओं की जांच कर रहा है।फिलहाल सभी फरार कैदियों के पकड़े जाने से पुलिस को राहत मिली है, लेकिन जेल सुरक्षा में सुधार और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।
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