तमिलनाडू
विजय की सर्वदलीय बैठक के बाद बड़ा ऐलान तमिलनाडु विधानसभा में आएगा प्रस्ताव
Ratna Netam
8 Aug 2026 8:52 PM IST

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चेन्नई : तमिलनाडु में परिसीमन के मुद्दे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। राज्य में परिसीमन की किसी भी संभावित पहल के खिलाफ सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर अपनी आपत्ति औपचारिक रूप से दर्ज कराने की तैयारी में है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय की अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में शामिल नेताओं ने राज्य के हितों और मौजूदा राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर एकजुट रुख अपनाने का फैसला किया है। बैठक में नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे परिसीमन के जरिए निर्वाचित प्रतिनिधियों की सीटों की संख्या में किसी तरह के बदलाव के पक्ष में नहीं हैं।
बैठक में शामिल नेताओं का कहना है कि परिसीमन लागू होने की स्थिति में तमिलनाडु को आने वाले कई दशकों तक इसके राजनीतिक और प्रतिनिधित्व संबंधी प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। नेताओं ने आशंका जताई कि राज्य में लोकसभा सीटों की संख्या में बदलाव होने से दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से बैठक में मौजूद दलों ने मौजूदा स्थिति को बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
बैठक के बाद कांग्रेस सांसद ज्योतिमणि ने कहा कि उनकी पार्टी परिसीमन का समर्थन नहीं करेगी। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय की ओर से सर्वदलीय बैठक बुलाए जाने को महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके मुताबिक, राज्य के लोगों के हितों और अधिकारों की रक्षा के लिए सभी दलों को एकजुट होकर अपना पक्ष रखना चाहिए। नेताओं का कहना है कि परिसीमन केवल सीटों की संख्या का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी से भी है।
सर्वदलीय बैठक में सत्तारूढ़ दल के साथ टीवीके गठबंधन से जुड़े कई दलों के सांसद भी शामिल हुए। कांग्रेस, वीसीके, एमडीएमके और आईयूएमएल के प्रतिनिधियों ने बैठक में हिस्सा लिया। इसके अलावा सीपीआई और सीपीआई-एम जैसे दल भी बैठक में शामिल हुए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कुल 19 सांसद बैठक में मौजूद रहे। इन नेताओं ने परिसीमन के मुद्दे पर राज्य के हित में एक साझा रुख अपनाने पर सहमति जताई।
हालांकि, विपक्षी डीएमके ने इस बैठक में हिस्सा नहीं लिया। डीएमके सांसद कनिमोझि ने मुख्यमंत्री विजय की प्राथमिकताओं को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को कर्नाटक में प्रस्तावित मेकदातु बांध के मुद्दे पर भी घेरा और उनसे इस विषय पर ठोस कदम उठाने की चुनौती दी। डीएमके के बैठक से दूरी बनाने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर दलों के बीच मतभेद भी सामने आए हैं।
बैठक में शामिल नेताओं ने कहा कि वे परिसीमन के किसी भी ऐसे प्रस्ताव का विरोध करेंगे जिससे तमिलनाडु के मौजूदा राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव हो। उनका तर्क है कि राज्य ने लंबे समय से जनसंख्या नियंत्रण और विकास के विभिन्न मानकों पर काम किया है। ऐसे में केवल जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व तय करने से उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण की दिशा में बेहतर प्रदर्शन किया है।
तमिलनाडु सरकार की ओर से विधानसभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी को इसी राजनीतिक रुख का हिस्सा माना जा रहा है। प्रस्ताव के जरिए केंद्र स्तर पर परिसीमन की किसी संभावित प्रक्रिया को लेकर राज्य की आपत्ति दर्ज कराने की कोशिश होगी। सरकार और उसके सहयोगी दल चाहते हैं कि इस मुद्दे पर राज्य के राजनीतिक हितों को प्राथमिकता दी जाए और मौजूदा प्रतिनिधित्व में किसी तरह का अचानक बदलाव न किया जाए।
परिसीमन का मुद्दा आने वाले समय में तमिलनाडु की राजनीति में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। एक तरफ सरकार और उसके सहयोगी दल इसे राज्य के अधिकारों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग रुख दिखाई दे रहा है। सर्वदलीय बैठक के बाद अब विधानसभा में प्रस्ताव लाने की तैयारी पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रस्ताव किस स्वरूप में सामने आता है और राज्य की राजनीति में इसे लेकर आगे किस तरह की रणनीति अपनाई जाती है।
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