
चेन्नई : तमिलनाडु के दो प्रमुख शहरों मदुरै और कोयंबटूर में मेट्रो रेल परियोजना को लेकर एक बार फिर निराशाजनक खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार ने इन दोनों शहरों के लिए प्रस्तावित मेट्रो रेल परियोजना को एक बार फिर मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। इससे राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी शहरी परिवहन योजना को बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन परियोजना के भविष्य को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
तमिलनाडु में मेट्रो रेल सेवा की शुरुआत सबसे पहले राजधानी चेन्नई में हुई थी। वर्ष 2015 से चेन्नई मेट्रो का संचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है और यह शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। वर्तमान में चेन्नई मेट्रो दो प्रमुख कॉरिडोर पर संचालित हो रही है, जबकि इसके विस्तार का कार्य तेजी से जारी है। आने वाले समय में इसे चार प्रमुख रूटों तक विस्तारित करने की योजना पर काम किया जा रहा है, जिससे लाखों यात्रियों को बेहतर और तेज परिवहन सुविधा मिल सकेगी।
चेन्नई मेट्रो की सफलता को देखते हुए चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने राज्य के अन्य बड़े शहरों में भी मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना बनाई थी। इसी क्रम में मदुरै और कोयंबटूर जैसे तेजी से विकसित हो रहे महानगरीय क्षेत्रों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई। इस रिपोर्ट में दोनों शहरों की वर्तमान और भविष्य की यातायात आवश्यकताओं, जनसंख्या वृद्धि, शहरी विस्तार तथा आर्थिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए मेट्रो नेटवर्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था।
सीएमआरएल द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तमिलनाडु सरकार को सौंपी गई थी। राज्य सरकार ने परियोजना की उपयोगिता और आवश्यकता को देखते हुए पिछले वर्ष इसे अपनी मंजूरी दे दी थी। इसके बाद परियोजना को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र सरकार के पास भेजा गया था। उम्मीद की जा रही थी कि केंद्र की मंजूरी मिलने के बाद परियोजना के लिए वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा।
हालांकि अब सामने आई खबरों के अनुसार केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को एक बार फिर स्वीकार नहीं किया है। इससे दोनों शहरों में मेट्रो परियोजना की शुरुआत फिलहाल अनिश्चितता में पड़ गई है। माना जा रहा है कि परियोजना की लागत, वित्तीय व्यवहार्यता, यात्री संख्या के अनुमान और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर केंद्र स्तर पर कुछ आपत्तियां हो सकती हैं। हालांकि इन कारणों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मदुरै और कोयंबटूर तमिलनाडु के प्रमुख औद्योगिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक केंद्र हैं। कोयंबटूर को राज्य की औद्योगिक राजधानी भी कहा जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग काम, व्यापार और शिक्षा के लिए यात्रा करते हैं। वहीं मदुरै दक्षिण तमिलनाडु का प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र है। इन दोनों शहरों में लगातार बढ़ते यातायात और वाहनों की संख्या को देखते हुए मेट्रो रेल परियोजना को भविष्य की आवश्यकता माना जा रहा था।
शहरी परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन शहरों में मेट्रो सेवा शुरू होती है तो सड़क यातायात का दबाव कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और लोगों को सुरक्षित, तेज तथा सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध होगा। इसके अलावा मेट्रो परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और शहरी विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद थी।
परियोजना को लेकर राज्य सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। संभावना जताई जा रही है कि तमिलनाडु सरकार केंद्र से दोबारा बातचीत कर परियोजना के पक्ष में अपने तर्क रख सकती है। यदि आवश्यक हुआ तो परियोजना रिपोर्ट में संशोधन कर उसे फिर से मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है।
इस बीच राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे को लेकर प्रतिक्रियाएं आने की संभावना है। विपक्ष और विभिन्न सामाजिक संगठनों का कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे शहरों में आधुनिक परिवहन सुविधाओं का विस्तार समय की जरूरत है और इस दिशा में केंद्र तथा राज्य सरकारों को मिलकर समाधान निकालना चाहिए।
परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में मदुरै और कोयंबटूर जैसे शहरों में जनसंख्या और यातायात का दबाव और बढ़ेगा। ऐसे में यदि समय रहते आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित नहीं की गई तो सड़क जाम, प्रदूषण और यात्रा समय जैसी समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं।
फिलहाल, मदुरै और कोयंबटूर मेट्रो परियोजना को केंद्र सरकार से मंजूरी न मिलने की खबर ने इन दोनों शहरों के लोगों की उम्मीदों को झटका दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य सरकार परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए क्या रणनीति अपनाती है और क्या भविष्य में इस महत्वाकांक्षी योजना को केंद्र से हरी झंडी मिल पाती है। तब तक दोनों शहरों के नागरिक आधुनिक मेट्रो सेवा के इंतजार में रहेंगे।





