
चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने भाजपा की अधिवक्ता शाखा के राज्य सचिव, अधिवक्ता डी. एलेक्सिस सुधाकर के खिलाफ कोयंबटूर और तिरुकाझुकुंदराम के संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा जारी रिमांड आदेशों को अवैध करार दिया है।
न्यायमूर्ति जी.के. इलांथिरायन ने हाल ही में सुधाकर द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया। सुधाकर को हथियार रखने और धोखाधड़ी के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।
सुधाकर की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अबुदु कुमार राजरत्नम ने दलील दी कि पुलिस ने राजनीतिक प्रतिशोध के चलते उन्हें कई आपराधिक मामलों में झूठा फंसाया और पिछले साल गिरफ्तार किया गया था।
न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा जारी रिमांड आदेश मनमाने थे और संविधान के अनुच्छेद 22 (1) का उल्लंघन करते थे, जो गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी प्राप्त करने और अपनी पसंद के वकील से परामर्श करने और बचाव करने के अधिकार की गारंटी देता है।
उन्होंने यह भी कहा कि सुधाकर को गिरफ्तार करते समय पुलिस अधिकारियों ने गिरफ्तारी के कारणों और आधारों की जानकारी देने सहित अनिवार्य वैधानिक सुरक्षा उपायों की अनदेखी की।
न्यायमूर्ति इलांथिरयन ने कहा कि गिरफ्तारी ज्ञापन के अवलोकन से पता चलता है कि गिरफ्तारी का आधार और कारण नहीं बताए गए थे। इसके अलावा, ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं है जिससे पता चले कि याचिकाकर्ता के परिवार को गिरफ्तारी की जानकारी दी गई थी।
न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि अनिवार्य प्रावधानों का पालन न करना स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि जब याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी के कारणों और आधारों की जानकारी नहीं दी गई तो रिमांड अपने आप में अवैध है।





