
चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने एक महिला को 3 लाख रुपये का मुआवज़ा देने के सिंगल जज के आदेश को पलट दिया है। इस महिला को रानीपेट के सरकारी अस्पताल में नसबंदी (ट्यूबैक्टोमी) करवाने के बाद भी गर्भ ठहर गया था।
चीफ जस्टिस सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी अरुल मुरुगन की बेंच ने राज्य स्वास्थ्य विभाग की अपील को मंज़ूरी देते हुए सिंगल जज के आदेश को रद्द कर दिया।
रानीपेट की रहने वाली रिहाना के तीन बच्चे थे, जब उसने 2018 में अरकोट के सरकारी अस्पताल में सर्जरी करवाई थी। हालांकि, 2021 में वह गर्भवती हो गई। इसके बाद उसने मेडिकल लापरवाही का आरोप लगाते हुए और मुआवज़े की मांग करते हुए हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
सिंगल जज ने 3 लाख रुपये का मुआवज़ा देने के अलावा सरकार को बच्चे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने का भी आदेश दिया था। आदेश को पलटते हुए बेंच ने कहा कि राज्य सरकार के ऐसे असफल सर्जिकल प्रोसीजर से जुड़े सरकारी आदेश (G.O.) के अनुसार, प्रभावित महिला केवल 60,000 रुपये के मुआवज़े की हकदार है।
बेंच ने यह भी कहा कि महिला मेडिकल लापरवाही के दावे को साबित करके उचित सिविल कोर्ट में जाकर ज़्यादा मुआवज़े के लिए उपाय मांग सकती है। WhatsApp पर The New Indian Express चैनल को फ़ॉलो करें





