
Tamil Nadu तमिलनाडु: चेन्नई में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया नियंत्रण से जुड़े एक अहम मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु साइबर क्राइम डिवीजन पुलिस के नोटिस पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया है। यह मामला सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर राजनीतिक टिप्पणियों वाले अकाउंट्स को ब्लॉक करने के निर्देश से जुड़ा हुआ है।
मामले के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नॉर्थ तमिलनाडु अध्यक्ष चोक्कालिंगम ने मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि साइबर क्राइम ब्रांच ने 8 मई को एक नोटिस जारी कर ऐसे X अकाउंट्स को ब्लॉक करने के निर्देश दिए थे, जिन पर सरकार के खिलाफ आलोचनात्मक या राजनीतिक टिप्पणियां पोस्ट की जा रही थीं।
याचिका में यह भी कहा गया कि कुछ अकाउंट्स को बिना उचित जांच और विश्लेषण के यह मानते हुए बंद करने का निर्देश दिया गया कि वे सार्वजनिक शांति के लिए हानिकारक हैं। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और बिना ठोस आधार के सोशल मीडिया अकाउंट्स को बंद करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।
कोर्ट में दायर याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि कुछ ऐसे अकाउंट्स को भी ब्लॉक कर दिया गया, जिनकी पोस्ट में किसी तरह की हिंसा भड़काने वाली सामग्री नहीं थी और जो केवल राजनीतिक राय व्यक्त कर रहे थे। याचिकाकर्ता ने इसे मनमाना और गैर-कानूनी कदम बताया।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्राथमिक रूप से यह माना कि सोशल मीडिया पर कंटेंट को हटाने या अकाउंट ब्लॉक करने जैसे कदमों के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और उचित जांच आवश्यक है। इसी आधार पर कोर्ट ने साइबर क्राइम डिवीजन के नोटिस पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश जारी किया।
यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा जब तक मामले की आगे की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती और अंतिम निर्णय नहीं आ जाता। कोर्ट ने संकेत दिया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है, और किसी भी कार्रवाई में उचित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
इस फैसले के बाद सोशल मीडिया कंट्रोल और सरकारी एजेंसियों की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भविष्य में डिजिटल अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।
राज्य प्रशासन की ओर से अभी तक इस आदेश पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मामला अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।





