
चेन्नई: मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) द्वारा 23 अप्रैल को होने वाली वोटिंग के लिए निगरानी और चुनाव निगरानी सेवाओं के लिए शुरू की गई टेंडर प्रक्रिया में दखल देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि टेंडर की शर्तों को याचिकाकर्ताओं के हिसाब से बदला नहीं जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पहली बेंच ने I-Net Secure Labs और Innovatiview India Limited द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में बोली लगाने वालों के लिए 100 करोड़ रुपये के औसत सालाना टर्नओवर की पात्रता शर्त को चुनौती दी गई थी।
कोर्ट ने कहा, "जब प्रतिवादियों ने साफ तौर पर कहा है कि टेंडर चुनाव से जुड़ी गतिविधियों की समय-सीमा और संवेदनशील प्रकृति को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया है, और याचिकाकर्ता की ओर से इसके खंडन में कुछ भी पेश नहीं किया गया है, तो हमें याचिकाकर्ता के वकील द्वारा दी गई दलीलों में कोई दम नहीं लगता।"
यह टेंडर 75,032 मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग के लिए जारी किया गया था, जिसमें हर केंद्र पर दो कैमरे लगाने थे, साथ ही मतगणना केंद्रों पर CCTV कवरेज और रिकॉर्डिंग की व्यवस्था भी करनी थी। अधिसूचना के क्लॉज़ 4(5) के तहत यह अनिवार्य है कि बोली लगाने वालों का पिछले तीन ऑडिट किए गए वित्तीय वर्षों में औसत सालाना टर्नओवर 100 करोड़ रुपये होना चाहिए।





