तमिलनाडू

LPG मूल्य अंतर के चलते ऑटो ड्राइवरों की ऑनलाइन राइड्स पर असर

Payal
21 April 2026 3:06 PM IST
LPG मूल्य अंतर के चलते ऑटो ड्राइवरों की ऑनलाइन राइड्स पर असर
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Chennai.चेन्नई: चेन्नई में हाल ही में LPG की कीमतों में अंतर आने के बाद ऑटो रिक्शा चालकों का ऑनलाइन राइड ऐप्स से दूर होना एक गंभीर मुद्दा बन गया है। ऑटो चालकों का कहना है कि पेट्रोल और LPG की बढ़ती कीमतें उन्हें ऐप्स पर राइड देने में आर्थिक रूप से हतोत्साहित कर रही हैं।
स्थानीय ऑटो ड्राइवरों ने बताया कि LPG की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण रोजमर्रा की आय पर असर पड़ा है। कई ड्राइवर अब ऐप्स के माध्यम से राइड लेने के बजाय स्थानीय क्षेत्र में सीधे यात्रियों को ले जाना पसंद कर रहे हैं, ताकि वे कमाई पर नियंत्रण रख सकें और अतिरिक्त खर्च से बच सकें।
ऑटो चालक रामकृष्ण ने कहा, “अगर LPG महंगा है और राइड के दाम तय हैं, तो हमें नुकसान ही होगा। ऐप्स से दूरी बनाना मजबूरी बन गई है। हम अपनी आमदनी सुरक्षित रखना चाहते हैं।”
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से ऑनलाइन राइडिंग प्लेटफॉर्म्स की संख्या और सेवा की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। जब चालक ऐप्स से दूरी बनाते हैं, तो यात्रियों को राइड उपलब्धता में कमी और लंबी प्रतीक्षा समय जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
चेन्नई में कई ऑटो चालक अब केवल उन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं जहां उन्हें सीधे यात्रियों से संपर्क मिलता है। इससे ऐप-आधारित राइडिंग प्लेटफॉर्म्स के संचालन और लॉजिस्टिक प्रबंधन में भी मुश्किलें बढ़ रही हैं।
पेट्रोल और LPG की कीमतों में अंतर ने ऑटो चालकों की रोजमर्रा की योजना को प्रभावित किया है। चालकों का कहना है कि जब ईंधन महंगा हो और राइड्स का किराया स्थिर रहे, तो लाभ कम हो जाता है। इस कारण कई चालक ऐप्स पर कम समय दे रहे हैं और स्थानीय स्तर पर अधिक राइड लेना पसंद कर रहे हैं।
ऑनलाइन राइड प्लेटफॉर्म्स ने इस समस्या का समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। उन्होंने ड्राइवरों को LPG सब्सिडी और ईंधन भत्ते जैसी सुविधाओं की पेशकश करने की योजना बनाई है। प्लेटफॉर्म प्रबंधन का कहना है कि ड्राइवरों को समर्थन देकर ही सेवा को स्थिर और विश्वसनीय बनाए रखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, LPG की कीमतों में अंतर और बढ़ोतरी ने चेन्नई के ऑटो चालकों को ऐप्स से दूरी बनाने पर मजबूर कर दिया है। इससे यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है और राइडिंग प्लेटफॉर्म्स के संचालन पर भी असर पड़ा है। चालकों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकारी और प्राइवेट पहल की जरूरत है।
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