
Tamil Nadu तमिलनाडु: डेल्टा जिलों के किसानों के लिए इस साल धान की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ गई है। मेट्टूर डैम में पानी का स्तर कम होने के कारण 12 जून को डेल्टा क्षेत्र के लिए सिंचाई के लिए पानी छोड़ने का काम टाल दिया गया है। डेल्टा जिलों में अधिकतर किसान नदी से मिलने वाले पानी पर निर्भर रहते हैं और इसी पानी से वे अपनी कुरुवई फसल की सिंचाई करते हैं।
मेट्टूर डैम सामान्य रूप से हर साल 12 जून को खोला जाता है और 28 जनवरी को बंद कर दिया जाता है। पिछले वर्षों में, 2020 से 2024 को छोड़कर, डैम समय पर खुलता रहा, क्योंकि जलाशय में पर्याप्त पानी रहता था। डेल्टा क्षेत्र में समय पर सिंचाई मिलने से धान की फसल अच्छी होती है और किसानों की आय सुनिश्चित रहती है।
हालांकि, इस साल डैम खोलने के लिए आवश्यक जलस्तर तक पानी नहीं पहुंच पाया। डेल्टा सिंचाई के लिए मेट्टूर डैम को 90 फीट से ऊपर पानी का स्तर होना चाहिए। मंगलवार शाम तक डैम में पानी का स्तर केवल 79.73 फीट था और पानी का रिजर्व 41.68 फीट ही था। ऐसे में 12 जून को डैम खोलने की संभावना नहीं है।
कर्नाटक में भी डैम में पानी का रिजर्व कम होने के कारण अधिकारियों का अनुमान है कि मेट्टूर डैम इस साल अगस्त में ही खोला जाएगा। इससे डेल्टा के किसानों को समय पर सिंचाई नहीं मिल पाएगी और कुरुवई फसल प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि डैम अगस्त तक नहीं खुलता है, तो इस बार कुरुवई फसल का क्षेत्र पहले की तुलना में कम रह सकता है।
किसान संगठन और कृषि विशेषज्ञ इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि समय पर सिंचाई न मिलने से फसल की पैदावार घट सकती है और किसानों की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, देर से पानी मिलने के कारण फसल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि वे पानी के स्तर की लगातार निगरानी कर रहे हैं और डैम खोलने के लिए तैयार हैं जैसे ही जलस्तर बढ़ेगा। वहीं, किसानों से भी अपील की गई है कि वे इस समय अल्टरनेट योजना के तहत फसल की तैयारी करें और पानी के अभाव के लिए तैयार रहें।
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी यह मामला गंभीर माना जा रहा है। डेल्टा जिलों में धान की फसल तमिलनाडु की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, जल प्रबंधन और सिंचाई के लिए आवश्यक कदम उठाने की योजना बनाई जा रही है।
इस साल मेट्टूर डैम में कम पानी के कारण डेल्टा जिलों में धान की पैदावार प्रभावित होने की संभावना ने किसानों में चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय कृषि अधिकारी और जल संसाधन विभाग की टीम इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और जल्द से जल्द समाधान निकालने के प्रयास में हैं।





